जानिए ,60 वर्ष की उम्र में भी कैसे रह सकते हैं जवान

वैसे तो  वृद्धावस्था का प्रारम्भ 60 वर्ष के बाद माना जाता है। लेकिन कुछ व्यक्तियों में यह 60 से पहले या 65 वर्ष के बाद समझा जा सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति अपने बारे में कैसी सोच रखता है। एक व्यक्ति 60 वर्ष की उम्र में भी वही स्फूर्ति रख सकता है जो 45 या 50 वर्ष की प्रौढ़ावस्था में होती है। वहीं दूसरा व्यक्ति 30 की उम्र में भी अपने को शक्तिहीन, इच्छारहित, सुस्त तथा चिंताग्रस्त महसूस कर सकता है। वह आयु से अधिक बूढ़ा लगने लगता है। इसलिए वृद्धावस्था केवल उम्र पर नहीं हमारी सोच पर निर्भर होती है।

वृद्धों में भी दो तरह के लोग होते हैं एक वह जो यह मान लेते हैं कि जैसे भी उनका जीवन है वह वैसा ही होना था और उसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता था। यानि वह अपने जीवनचक्र से संतुष्ट रहते हैं। इसके विपरीत दूसरे वह लोग जो यह मानते हैं कि अब नया जीवन प्रारम्भ करने के लिए समय बहुत कम है ,जीवन से संतोष प्राप्त करने के लिए अब नए रास्ते नहीं अपनाए जा सकते हैं।

ऐसा देखा गया है कि जो व्यक्ति 75 वर्ष से अधिक आयु तक जीवित रहते हैं उनमें से अधिकतर लोग जो साधारण लेकिन पोषणयुक्त भोजन करते हैं , सबसे मिलते -जुलते हैं, अपनी छुट्टी का समय ऐसे कार्यों में लगाते हैं जो उनको संतुष्टि प्रदान करे। वह प्रतिदिन कसरत करते हैं, जिसमें पैदल चलना सबसे जरूरी है।

वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क के सम्बंध में यह खोज की , कि जैसै -जैसे हमारी आयु बढ़ती है हम लगभग 5-10 प्रतिशत न्यूरोन्स (70 वर्ष की आयु तक) खो देते हैं। फिर भी विशेषज्ञों का कहना है कि मस्तिष्क अपने कार्य करने की क्षमता का केवल एक भाग ही वृद्धावस्था में खोता है। इसलिए उम्र से ज्यादा आपकी सोच आपको बूढ़ा बनाती है।