जिंदगी में केवल एक बार कर लीजिए माता वैष्णों देवी की आरती के दर्शन..जिंदगी सफल हो जाएगी

New Delhi : हमारे भारत देश को धार्मिक देश के रूप जाना जाता हैं। यहाँ आपको हर कदम पर मंदिर देखने को मिल जाएंगे। उन्हीं में से सबसे पवित्र मंदिर या तीर्थ स्थल माँ वैष्णी देवी का मंदिर माना जाता है। माँ वैष्णो देवी पहाड़ों की वादियों पर बसी हैं। इनके कई चमत्कारी रहस्यों ने सभी लोगों को हैरान कर दिया है। हर साल ठंड की ठिठुरन में भी भक्त माँ वैष्णो के दर्शन करने जाते हैं। चाहे कितनी भी ठंड हो लेकिन भक्त माँ का दर्शन किये बगैर नहीं आते हैं। माँ वैष्णो की गुफा से जुड़े कई हैरान कर देने वाले चमत्कार भी देखे गये हैं।

इन्हीं चमत्कारों को देखने के लिए लोग आज भी लाखों की तादाद में हर साल जाते हैं। आइए जानते हैं की आखिर माँ की गर्भ गुफा में ऐसा क्या है कि जो व्यक्ति के एक बार जाने के बाद जिंदगी में दोबारा कभी नहीं जाता है। आइए जानते हैं इसके बारे में…..
मान्यता है की माँ वैष्णो की इस गुफा के दर्शन सिर्फ और सिर्फ किस्मत वालों को ही मिलता हैं क्योंकि कुछ व्यक्ति माँ वैष्णो देवी के मंदिर तो पहुँच जाते हैं परंतु दर्शन नहीं कर पाते हैं और उन्हें बिना दर्शन के वापस आना पड़ता हैं। माना जाता हैं की बुरे कर्म वाले व्यक्ति गुफा में फंस जाते हैं और आगे नहीं जा पाते हैं। वहीं पर गर्भगुफा का प्राचीन दरवाजा भी भक्तों की ज्यादा संख्या देख कर ही खोला जाता हैं।
(2) मान्यता हैं की जो व्यक्ति गर्भगुफा का एक बार दर्शन कर लेता हैं वह व्यक्ति पूरी जिंदगी सुखी जीवन व्यतीत करता है।
(3) जिस प्रकार बच्चा अपना माँ के गर्भ से एक बार निकल जाता हैं तो दोबारा गर्भ में नहीं जा सकता है ठीक उसी प्रकार माँ के इस गर्भ गुफा में व्यक्ति पूरी जिंदगी में एक ही बार जा सकता हैं।
(4) इस गर्भ गुफा की एक खासियत हैं की इसमें से पवित्र गंगा जल निकलता है जो अपने आप में ही एक चमत्कार है।
(5) बताया जाता हैं की इस गुफा में भैरव का शरीर रखा है। जब माँ वैष्णों ने भैरव को त्रिशूल से मारा था तो भैरव का सिर उड़कर भैरव घाटी में चला गया और शरीर उसी गुफा में रह गया था। तब से लेकर आजतक भैरव का शरीर उसी गुफा में हैं।

(6) माँ वैष्णो देवी के इस गुफा तक पहुंचने में कुंवारी या आद्यकुंवारी घाटी होकर गुजरना पड़ता है। इस गुफा को गर्भगुफा के नाम से जाना जाता है। वो इसलिए क्योंकि इस गुफा में माँ 9 महीने रही हैं जैसे कोई शिशु अपने माँ के गर्भ में रहता है।

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