जनतंत्र के सामने डरतंत्र नतमस्तक , झारखण्ड में इनामी नक्सलियों ने किया मतदान

इस चुनावी संग्राम में झारखण्ड लोकसभा चुनाव में जो देखने को मिला उससे यह अंदाजा लग चुका है की सरकारी नीतियों के विरोधी भी अब लोकतंत्र की ताकत को पहचान चुके है. हाल ही में झारखण्ड की चार सीटों पर 65 प्रतिशत मतदान हो चुका है और इस बार मतदान में भागीदारी न सिर्फ आम जनता की रही बल्कि इनामी नक्सलवादियों ने भी बुलेट को न चुनते हुए बैलेट को चुना और लोकतंत्र में हिस्सेदारी भीं दर्ज करवाई। नक्सल प्रभावित इलाको में मतदाताओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इस बार नक्सलवाद कमजोर पड़ गया। आईपीएस अधिकारी SANJAY A . LATHKAR ने अपने ट्विटर अकाउंट से जानकारी साझा की है।

लाखो के इनामी नक्सली विवेक , अनल , गुलशन , नुनूचन्द , सचिन ने मतदान में हिस्सा लिया इतना ही नहीं नक्सलियों के परिवारिजन भी लोकतंत्र की ताकत के सामने नतमस्तक नज़र आ रहे थे। इनामी नक्सली सचिन के माता पिता ने भी मतदान किया।

नक्सली हमेशा ही चुनावों का विरोध करते आये है और सरकार की तमाम नीतियों का बहिस्कार तक करते हैं। नक्सलवाद हमारे देश की मुख्य समस्याओं में से एक रहा है। देश में दंगे – फसाद , हत्याएं , लूट पाट करने में नक्सलियों का सबसे बड़ा हाथ रहता है। यहाँ तक की नक्सली अपने आस पास के ग्रामीण इलाको में ग्रामीणों से भी चुनावो में हिस्सा न लेने की अपील करते है।

लेकिन इस बार युवाओं और महिलाओं में चुनावों को लेकर खासी उत्साह देखा गया। गिरडीह में 65 प्रतिशत , धनबाद में 61. 90 प्रतिशत और जमशेदपुर में 66. 44 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने अनुभव का इस्तेमाल किया। अभी तक के रिकॉर्ड में नक्सलवाद से सबसे ज्यादा खतरा झारखण्ड को पहुंचा है।

मतदान के मामले में झारखंड रहा देशभर में सबसे आगे। निर्वाचन आयोग से जुडी जानकारी के अनुसार झारखण्ड में सबसे ज्यादा वोट प्रतिशत दर्ज किया गया है। बीहड़ इलाको में भारी संख्या में मतदाताओं को देखकर समझ आ रहा था की अब ग्रामीणों के मन से नक्सलवाद का खौफ खत्म हो रहा है।

इस बार नक्सलियों ने रोजगार मिलने और गाँव का विकास होने की उम्मीद से मतदान में हिस्सा लिया है.