रजत जीतने वाले दीपक ओलम्पिक में स्वर्ण के लिए देश से बाहर चाहते हैं ट्रेनिंग

New Delhi: चोट के कारण विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप में दीपक पुनिया स्वर्ण पदक जीतने का सपना अधुरा रह गया। भारत के युवा पहलवान दीपक पुनिया का कहना है कि उनका लक्ष्य ओलम्पिक में स्वर्ण जीतना है और इसके लिए वह देश से बाहर ट्रेनिंग करना चाहते हैं। टखने की चोट के कारण उन्हें अपना नाम वापस लेना पड़ा । निराशा जताते हुए दीपक ने कहा कि मैं थोड़ा निराश हूं कि मैं सोने के लिए नहीं लड़ सकता। लेकिन मैं यहां अपने प्रदर्शन से खुश हूं। मैं कड़ी मेहनत करूंगा और अपने ओलंपिक पदक के उद्देश्य को पूरा करूंगा।

दीपक को 86-किलोग्राम वर्ग के फाइनल में ईरान के हसन यजदानी का सामना करना था। अब उन्हें रजत पदक के साथ समझौता करना होगा और इसके साथ ही संतुष्ट होना पड़ेगा। दीपक पूनिया के प्रशंसकों में इस खबर से निराशा छा चुकी है। कजाकिस्तान में चल रहे विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप में तिरंगा लहराते हुए 86 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में पूनिया ने प्रवेश किया था।

स्विटजरलैंड के स्टीफन रीचमुथ को 8-2 से हराकर पुनिया ने विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप के फाइनल में जगह बनाई थी। विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप के फाइनल में जगह बनाने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय बन गए थे। 86 किग्रा वर्ग के फाइनल में आज रेसलर दीपक पूनिया का मुकाबला ईरान के महान हसन यजदानी के साथ होना तय था।

इससे पहले पूनिया ने क्वार्टर फाइनल में कोलंबिया के कार्लोस आर्टुरो इक्विएर्डो मेंडेज़ को हराया था। अगले साल टोक्यो ओलंपिक के लिए बर्थ सुरक्षित करने वाले चौथे भारतीय पहलवान बने हैं। विनेश फोगट, बजरंग पुनिया और रवि कुमार पहले ही 2020 टोक्यो ओलंपिक के लिए अपना टिकट हासिल कर चुके हैं। इन सबी रेसलरों ने अपने-अपने भार वर्ग में कांस्य पदक जीता है।