बिहार में इंसेफलाइटिस से मौ’त का आंकड़ा हुआ 128, लेकिन सरकार मौन

बिहार में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम(AES) से म’रने वालों का आंकड़ा 128 पहुँच चुका है लेकिन सरकार के प्रतिनिधि चुप्पी साधे हैं। बिहार एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के अनुसार एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के कारण बिहार में मौ’त का आंकड़ा 128 पहुँच चुका है। लेकिंन जब मौ’तों के बारे में बुधवार सुबह बिहार के उप मुह्यमंत्री सुशील कुमार मोदी से पूछा गया तो उन्होंने चुप्पी साध ली।

इंसेफलाइटिस यानी चमकी बुखार से म’रने वालों का आंकड़ा हर रोज़ बढ़ते जा रहा है। बुधवार को ही मुजफ्फरपुर के श्री कृष्णा मेमोरियल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में 5 से ज्यादा बच्चों की मौ’त हो गयी। SKMC के अधीक्षक सुनील शाही ने इसकी जानकारी दी।

एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जब सुशील मोदी से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा,“मैंने आपको पहले ही बता दिया है कि ये प्रेस कांफ्रेंस बैंकर समिति के मसले पर है। बच्चों की मौ’त से जुड़े सवाल का जवाब जब उस विषय पर प्रेस कांफ्रेंस होगा तो दिया जाएगा। बैंकर से जुड़ा कोई सवाल पूछना है तो पूछिए वरना इस प्रेस कांफ्रेंस को यहीं समाप्त करते हैं।”

बता दें कि मुजफ्फरपुर में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से हो रही मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा। मुजफ्फरपुर के श्री कृष्णा मेमोरियल अस्पताल में अबतक इंसेफ़लाइटिस से 110 से ज्यादा लोगो की मौ’त हो चुकी है। कल ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अस्पताल का दौरा किया था और ज़रुरु निर्देश दिए थे। वहीँ केंद्रीय स्वस्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने भी अस्पताल का दौरा किया था।

मुजफ्फरपुर में इस चमकी बिहार से हर साल मौ’तें होती है। इसपर अस्पताल के अधीक्षक सुनील शाही ने कहा है कि नेताओं को अस्पताल की जगह बिमारी से ग्रस्त इलाकों का दौरा करना चाहिए और जागरूकता फैलानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में होगी मामले की सुनवाई:
मुजफ्फरपुर में इंसेफलाइटिस से लगातार हो रही मौ’तों के मद्देनज़र मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गयी है। इस जनहित याचिका में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन, बिहार हेल्थ मिन मंगल पांडे, एमओएस हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर मंत्री अश्विनी चौबे का नाम भी शामिल है। इस PIL की सुनवाई 26 जून को होगी।