साइबर क्रा’इम पड़ रहा है भारत को महंगा, 10.4 मिलियन डॉलर का घाटा

New Delhi: एक रिपोर्ट में कहा गया है कि साइबर ह’मलों की औसत आर्थिक लागत भारत में कुल मिलाकर 10.4 मिलियन डॉलर है।  जिसमें प्रत्यक्ष लागत के साथ-साथ अप्रत्यक्ष कारण जैसे कि नौकरी की हानि और व्यापक आर्थिक कारक शामिल हैं।

भारत में प्रत्यक्ष लागत केवल 0.9 मिलियन डॉलर है जबकि अप्रत्यक्ष नुकसान जैसे कि नौकरी की हानि और प्रतिष्ठा की हानि लगभग 3.1 मिलियन डॉलर है। कम ग्राहक और उद्यम व्यय जैसे मैक्रोइकॉनॉमिक प्रभाव  6.3 मिलियन डॉलर के करीब हैं।  यह अध्ययन 13 एशिया प्रशांत देशों के 1,300 व्यापार और आईटी संगठनों के सर्वेक्षण पर आधारित था।

कुल साइबर ह’मलों में 18 प्रतिशत निर्माण खातों का , लगभग 12 प्रतिशत वित्तीय सेवाओं का और सरकारी खातों का लगभग 11 प्रतिशत का योगदान होता है। 62 प्रतिशत के करीब संगठनों ने भारत में साइबर ह’मलों की घ’टनाओं को देखा। केवल 38 प्रतिशत कंपनियों ने यह सुनिश्चित करने के लिए नियमित फोरेंसिक या डेटा ब्रीच आकलन किया है कि देश में कोई सुरक्षा ख’तरा नहीं है।

रिपोर्ट से पता चलता है कि साइबर सुरक्षा के आंकड़े शुरुआत के बजाय केवल डिजिटल परिवर्तन परियोजना के बाद के चरण में हैं। 20 प्रतिशत के करीब कंपनियां परियोजना की शुरुआत में साइबर सुरक्षा पर विचार करती हैं, जबकि परियोजना के बाद के चरणों में यह 40 प्रतिशत से अधिक है।

इसके अलावा कंपनियां अक्सर बाजार में उपलब्ध उत्पादों और सेवाओं की संख्या से घबरा जाती हैं।रिपोर्ट में सामने आया कि सुरक्षा बढ़ाने के बजाय उपलब्ध सुरक्षा नियंत्रण के संस्करणों पर विपरीत प्रभाव पड़ा। रिपोर्ट से पता चला कि 50 से अधिक सुरक्षा समाधान वाले संगठनों को लोगों की तुलना में अधिक घ’टनाओं का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट का कहना है कि संगठनों को ख’तरों का तेजी से और सटीक पता लगाने के लिए साइबर सुरक्षा में AI और स्वचालन का लाभ उठाना चाहिए।