चंद्रयान मिशन-2 की सफलता की नींव जवाहर लाल नेहरू और मनमोहन सिंह ने रखी थी : कांग्रेस

New Delhi : मिशन चंद्रयान 2 अब सफल हो चुका है। इसरो ने 22 जुलाई को दोपहर 2:43 बजे निर्धारित समय पर अपना मिशन चंद्रयान -2 सफलतापू्र्वक लॉन्च किया। इसके साथ ही मिशन की सफलता के लिए राजनीतिक खींच-तान भी देखने को मिल रही है। मिशन की सफलता पर इसरो को बधाई देते हुए कांग्रेस ने कहा है कि देश को कांग्रेस ने ही स्पेस के लिए समृद्ध बनाया है। पं. जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में साल 1962 को INCOSPAR की स्थापना की गई जो बाद में इसरो के नाम से संशोधित किया गया। जिसकी स्थापना के कारण ही पहला चंद्रयान मिशन 2008 में मनमोहन सरकार में सफल हो पाया। पहले चंद्रयान मिशन की सफलता के कारण ही हम चंद्रयान मिशन-2 की ओर अग्रसर हो पाए।

कांग्रेस पार्टी ने ट्वीट कर कहा कि देश का पहला सफल चंद्रयान मिशन कांग्रेस के नेतृत्व वाली मनमोहन सिंह सरकार में लांच किया गया। पहले मिशन की सफलता के बाद ही दूसरे मिशन का रास्ता साफ हो पाया और चंद्रयान-2 मिशन की रूपरेखा भी मनमोहन कैबिनेट में ही बनी थी।

 

इसरो ने 22 जुलाई को 2:43 PM के निर्धारित समय पर अपना चंद्र मिशन चंद्रयान -2 लॉन्च किया। इस चंद्रमा-लैंडर और रोवर मिशन का उद्देश्य चंद्रमा के अस्पष्टीकृत दक्षिणी ध्रुव की जांच करना है। चंद्रयान -2 के साथ भारत का लक्ष्य चंद्रमा पर सोफ्ट लैंडिंग है।

आपको बता दें चंद्रयान-2, चंद्रयान- 1 का ही नया संस्करण है। इसमें ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल हैं। चंद्रयान- 1 में केवल ऑर्बिटर था जो चंद्रमा की कक्षा में घूमता था। ऑर्बिटर चंद्रमा की सतह की तस्वीर बनाएगा और चंद्रमा पर खनिजों का मानचित्र तैयार करेगा। लैंडर जिसका वजन 1,471 किलोग्राम है, वह चंद्रमा-क्वेक की उपस्थिति और चंद्रमा की सतह के तापमान को मापेगा। वहीं 27 किलोग्राम वजनी प्रज्ञान रोवर चंद्रमा की मिट्टी का विश्लेषण करने के लिए कैमरों और उपकरणों से लैस है।

यह पहले अक्टूबर 2018 में लॉन्च होने वाला था। बाद में तारीख बढ़ाकर 3 जनवरी और फिर 31 जनवरी कर दी गई। कुछ कारणों से यह 31 जनवरी को भी लॉन्च नहीं हो पाया था। तारीख बढ़ाकर 15 जुलाई तक कर दी गई थी।

यह मिशन भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इससे इसरो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाली पहली अंतरिक्ष एजेंसी बन जाएगी और भारत चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन जाएगा। चंद्रयान 2 भी पहला भारतीय मिशन है जो घर में विकसित तकनीक के साथ चंद्र क्षेत्र का पता लगाएगा ।

यह मिशन 15 जुलाई को दुनिया के सामने लोहा मनवाने को तैयार था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान ने चंद्र मिशन चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण टाल दिया था क्योंकि लॉन्चिंग के कुछ देर पहले ही लॉन्चिंग व्हीकल सिस्टम में तकनीकी खराबी का पता चला था।