मजदूरों को बिहार भेजने के लिये CM Yogi तैयार, मदद भी करेंगे लेकिन कोई बुलाये तो

New Delhi : कोरोना आपदा और लॉकडाउन के कारण उत्तर प्रदेश में फंसे अन्य राज्यों के लोगों को वापस भेजने में योगी सरकार पूरा सहयोगी करेगी। बुधवार को मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि अगर अन्य राज्यों के लोगों को उनके गृह राज्य की सरकार वापस बुलाने का निर्णय लेगी तो प्रदेश सरकार न सिर्फ इसकी अनुमति देगी बल्कि उन्हें वापस भेजने में मदद भी करेगी। मुख्यमंत्री के इस फैसले से सबसे ज्यादा फायदा बिहार के प्रवासी मजदूरों को हो सकता है जो हजारों की संख्या में नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, कानपुर आगरा आदि जगहों पर फंसे हुए हैं।

इससे पहले योगी राजस्थान के कोटा में फंसे यूपी के छात्रों की प्रदेश वापसी करा चुके हैं। योगी के अलावा मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी अपने प्रदेश में फंसे प्रवासी मजदूरों को घर वापस भेजे जाने की बात कही थी। उन्होंने इस बाबत केंद्र सरकार से अपील की थी कि इन मजदूरों को घर वापस भेजने के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएं। सीएम कार्यालय की ओर से कहा गया कि मुश्किल समय में अपने परिवार और घर से दूर रहना इन मजदूरों के लिए यातना जैसा है। इसलिए केंद्र सरकार को इन्‍हें घर पहुंचाने पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
उद्धव के बाद योगी आदित्यनाथ ने प्रवासियों की घर वापसी के लिए कदम उठाने के संकेत दिये हैं। योगी ने बुधवार को एक हाई लेवल मीटिंग में अपनी यह मंशा जाहिर की। उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकारें चाहेंगी तो वह यूपी में फंसे उनके प्रदेश के लोगों को घर जाने की अनुमति दे देंगे। साथ ही घर पहुंचाने में उनकी मदद भी करेंगे।

मीटिंग में सीएम ने इसके अलावा रमजान महीने को लेकर अधिकारियों को खास सतर्क रहने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा – रमजान का महीना प्रारम्भ हो रहा है। इस अवधि में विशेष सावधानी बरती जाये। यह सुनिश्चित किया जाये कि सहरी और इफ्तार के समय किसी भी प्रकार से भीड़ एकत्र न होने पाये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं कोटा से प्रदेश वापस आए बच्चों से बात कर उनका हालचाल लेंगे। सीएम ने सचिवालय कर्मियों को एक-एक छोटा सैनिटाइजर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। योगी ने कहा – लॉकडाउन का मतलब पूर्ण लॉकडाउन है इसलिए इसका सख्ती से शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराया जाये। उन्होंने समस्त गतिविधियों में हर हाल में सामाजिक दूरी का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने एक उच्चस्तरीय बैठक में लॉकडाउन व्यवस्था की समीक्षा के दौरान निर्देश दिए कि लॉकडाउन अवधि में आवश्यक सामग्री की सुचारु आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए।

योगी ने कहा कि प्रत्येक मण्डल मुख्यालय पर एक टेस्टिंग (जांच) प्रयोगशाला स्थापित की जाए जिससे अधिक संख्या में टेस्टिंग सम्भव हो सके। उन्होंने कहा कि अलीगढ़, सहारनपुर तथा मुरादाबाद संक्रमण की दृष्टि से संवेदनशील हैं इसलिए इनके मण्डलीय चिकित्सालय में टेस्टिंग प्रयोगशाला स्थापित की जाए। राज्य सरकार के एक प्रवक्ता के मुताबिक बैठक में मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि अभी तक संक्रमण प्रभावित 10 जिले कोरोना वायरस से मुक्त हो चुके हैं जबकि 22 जिले पहले से ही कोरोना वायरस से मुक्त हैं।
इस प्रकार वर्तमान में प्रदेश के कुल 32 जिले कोरोना वायरस के संक्रमण से मुक्त हैं। योगी ने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण से मुक्त जिलों में भी पूरी सतर्कता एवं सभी सावधानियां बरतना आवश्यक है। यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी दशा में सुरक्षा चक्र टूटने न पाए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के दिशा-निर्देशों तथा शासन के नियमों का पालन करते हुए उन जिलों में औद्योगिक इकाइयों का संचालन कराया जाए जो कोरोना वायरस से प्रभावित नहीं है। परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल होने वाली विभिन्न प्रकार की निर्माण सामग्री के आवागमन की अनुमति दी जाए। इसके तहत भट्ठों से ईंट तथा बालू, मोरंग तथा सरिया लाने की अनुमति दी जाए। बाद में अपर मुख्य सचिव, गृह एवं सूचना, अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि प्रदेश में 12 हजार ईंट भट्ठों में 12 से 15 लाख श्रमिक कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि सात हजार औद्योगिक इकाइयों में लगभग 1.25 लाख लोग काम कर रहे हैं।

अवस्थी ने बताया कि 119 चीनी मिलों में लगभग 60 हजार मजदूरों को काम मिला है। मनरेगा के श्रमिकों को कार्य मिला है। लम्बे समय के बाद पहली बार गन्ना और गेहूं की कटाई में श्रमिकों की उपलब्धता के सम्बन्ध में कोई दिक्कत नहीं है। अवस्थी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने खाद्यान्न वितरण की प्रगति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी व्यक्ति को खाद्यान्न का अभाव न हो। अवस्थी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी ने रबी फसल की कटाई तथा गेहूं खरीद की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि किसानों को अपनी उपज के विक्रय में कोई असुविधा न हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसानों को उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त हो।

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