अगर जरूरत पड़ी तो मैं खुद जा सकता हूँ जम्मू-कश्मीर – चीफ जस्टिस रंजन गोगोई

New Delhi: भारत सरकार के कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से अब तक उस मुद्दे पर बहस और चर्चाएं जारी हैं। विपक्ष के कई नेता सुप्रीम कोर्ट में Kashmir जाने के लिए अर्जी दे चुके हैं। अब कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद को भी सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीर जाने की इजाजत दे दी है। इस सब के बाद चीफ जसिटस रंजन गोगोई ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो मैं भी जम्मू और कश्मीर जा सकता हूं।

गुलाम नबी आजाद को कश्मीर जाने की इजाजत देने के बाद चीफ जस्टिस गोगोई ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो मैं खुद जम्मू-कश्मीर जा सकता हूं। इससे पहले चीफ जस्टिस ने कहा था – सुप्रीम कोर्ट गुलाम नबी आजाद को श्रीनगर, बारामुला, अनंतनाग और जम्मू जाने की इजाजत देता है। उन्होंने कहा उन्हें किसी भी तरह का भाषण देने की अनुमति नहीं है और ना ही वो वहां कोई रैली कर सकते हैं।

कश्मीर को लेकर और क्या-क्या कहा है सुप्रीम कोर्ट ने?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा कि जम्मू-कश्मीर में सामान्य जीवन बहाल किया जाए और ऐसा करते समय राष्ट्रीय सुरक्षा और सुरक्षा को भी ध्यान में रखने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट में अनुराधा भसीन के इस दावे को भी केके वेणुगोपाल ने गलत बताया कि Kashmir में लोगों को मेडिकल सुविधाएं नहीं मिल रही हैं और कहा कि पूरे जम्मू-कश्मीर में 5.5 लाख से ज्यादा लोगों ने मेडिकल इलाज के लिए ओपीडी में मौजूद रहे हैं।

केके वेणुगोपाल ने वकील वृंदा ग्रोवर (कश्मीर टाइम्स के कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन का प्रतिनिधित्व) का विरोध करते हुए कहा कि सभी समाचार पत्र प्रकाशित हो रहे हैं और कई टीवी चैनल भी प्रसारित किए जा रहे हैं।

इसमें भारत के संघ की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अदालत को बताया कि मीडिया पेशेवरों को उनके काम के लिए लैंडलाइन और कई अन्य संचार सुविधाएं दी जा रही हैं।