हंगामे के बीच लोकसभा में पास हुआ ‘नागरिकता संशोधन बिल’, बाहरी नागरिकों को मिलेगा अधिकार

New Delhi:  संसद का शीतकालीन सत्र काफी हंगामेदार और आरोप-प्रत्यारोप से भरा हुआ है। हंगामे के बीच आखिरकार लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पास हो गया। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह बिल सिर्फ असम के लिए नहीं है बल्कि इन 6 देशों से आने वाले नागरिकों को पूरे देश में काम करने और रहने का अधिकार है। राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि अगर कोई ईसाई भी भारत का मूल निवासी कभी रहा है तो उसे भी हिन्दू, बौद्ध, सिख, जैन की तरह नागरिकता दी जाएगी।

गृह मंत्री ने सभी सदस्यों से इस बिल का समर्थन करने की अपील की और ध्वनि मत से नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा से पारित किया गया। इससे पहले लोकसभा में असम में ‘नगारिकता संशोधन विधेयक 2016’ पेश करने को लेकर तृणमूल कांग्रेस और एआईयूडीएफ सांसदों ने नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में संसद भवन परिसर में धरना दिया और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की।

 Lok Sabha

तृणमूल कांग्रेस और एआईयूडीएफ सांसदों का ये प्रदर्शन काफी अलग था। इस प्रदर्शन में एक व्यक्ति ने पीएम मोदी का मास्क पहना हुआ है और उसके हाथों में डंडा है। वहीं कुछ लोग नीचे बैठे हुए हैं और खुद को उस डंडे से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। तृणमूल सांसदों के हाथों में पोस्टर दिख रहे होंगे। जिन पर लिखा था कि मुझे मेरे देश से मत निकालो, मैं भारत का नागिरक हूं।

चलिए आपको बताते हैं कि ‘सिटिजनशिप बिल 2016’ क्या हैं.. दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ दिन पहले ही अपनी रैली में कहा था कि उनकी सरकार प्रस्तावित कानून को संसद की मंजूरी दिलाने की दिशा में काम कर रही है। इसके बाद असम में कई जगह विरोध भी हुए। नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2016, नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन करेगा और अफगानिस्तान, पाकिस्तान तथा बांग्लादेश के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी तथा ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को भारत में छह साल बिताने के बाद नागरिकता देने के लिए लाया गया है।