दु’ष्क’र्म के आरो’पी स्वामी चिन्मयानंद को संत समाज ने भी नकारा, दिखाया बाहर का रास्ता

New Delhi: पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता चिन्मयानंद शुक्रवार को एक लॉ स्टूडेंट से यौन उत्पी’ड़न के आरो’प में गिर’फ्तार किया गया था। उनकी मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। अब संत समाज ने भी उनसे दूरी बनाने का फैसला लिया है। संतों के निर्णय लेने वाला सर्वोच्च संगठन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (ABAP) चिन्मयानंद को संत समुदाय से बाहर करने के लिए तैयार है।

एबीएपी के अध्यक्ष, महंत नरेंद्र गिरि ने शनिवार को परिषद की बैठक के बाद कहा कि चिन्मयानंद को संत समुदाय से बाहर करने का फैसला किया गया है।

उन्होंने कहा, “अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की औपचारिक बैठक 10 अक्टूबर को हरिद्वार में होगी और इस निर्णय को मंजूरी भी मिल जाएगी।”

महंत नरेंद्र गिरि ने आगे कहा, “चिन्मयानंद ने अपने कु’कर्मों को स्वीकार कर लिया है और संत समुदाय के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता। जब तक न्यायालय का फैसला नहीं आएगा और निर्दोष साबित नहीं होंगे, तब तक वह संत समाज से बहि’ष्कृत ही रहेंगे।”

महंत नरेन्द्र गिरी ने यह भी कहा कि स्वामी चिन्मयानंद से 5 करोड़ की रंगदारी मांगने वाले तीन युवकों का वीडियो भी वायरल हुआ है। तीनों को गिर’फ्तार भी किया गया है। स्वामी चिन्मयानंद पर आ’रोप लगाने और रंगदारी मांगे जाने में शामिल लॉ छात्रा के खिलाफ भी कानून का शिकंजा कसा जाना चाहिए।

73 वर्षीय चिन्मयानंद वर्तमान में महानिर्वाणी अखाड़ा के महामंडलेश्वर हैं। चिन्मयानंद संत समुदाय से बाहर होने के बाद अब इस पद को भी खो देंगे और उनके नाम के आगे ’संत’ या स्वामी’ नहीं लगेगा।

बता दें कि चिन्मयानंद अयोध्या आंदोलन में भी प्रमुख खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में भी भाग लिया था। चिन्मयानंद ने महंत अवैद्यनाथ (उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरु) के साथ राम मंदिर मुक्ति यज्ञ समिति ’का गठन किया था। रामविलास वेदांती और रामचंद्र परमहंस जैसे अन्य संत भी बाद में आंदोलन में शामिल हो गए। वह 19 जनवरी 1986 को राम जन्मभूमि आन्दोलन संघर्ष समिति के संयोजक भी बने।

चिन्मयानंद ने अपने ऊपर लगे यौ’न उ’त्पीड़न के सभी आरोपों को कबूला,कहा- अपने किये पर शर्मिंदा हूं