मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री को खत लिख दो संवैधानिक संशोधनों का किया अनुरोध

New Delhi: खतों का दौर एक बार फिर से शुरू हो चुका है। हाल ही में हरियाणा के किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखकर आत्म’हत्या की अनुमति मांगी थी। अब मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री को तीन खत लिखे हैं। सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों में 43 लाख से अधिक लंबित मामलों के निपटारे के संबंध में मुख्य न्यायाधीश ने प्रधानमंत्री को खत लिखा है।

इन खतों में मुख्य न्यायाधीश ने दो संवैधानिक संशोधनों का अनुरोध किया है। उन्होंने अपने खत में अनुरोध किया है कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या में बढ़ोतरी की जाए और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष की जाए। प्रधानमंत्री को लिखे तीसरे खत में मुख्य न्यायाधीश ने संविधान के अनुच्छेद 128 और 224ए की ओर ध्यान खींचा है।

इन अनुच्छेदों के तहत सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के कार्यकाल की पुरानी परंपरा को फिर से लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसा करने से वर्षों से लंबित पड़ी मामलों का निपटारा हो सकेगा। मुख्य न्यायाधीश ने अपनी खत में लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट में इस समय न्यायाधीशों का कोई पद खाली नहीं है। कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या कुल 31 है और 58,669 मामले लंबित पड़े हैं। आए दिन इन मामलों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।

उन्होंने बताया कि 26 केस 25 सालों से, 100 केस 20 सालों से, 593 केस 15 सालों से और 4977 केस पिछले 10 सालों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। उन्होंने उच्च न्यायालयों के संदर्भ में लिखा है कि 24 उच्च न्यायालयों में 43 लाख केस लंबित हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 31 से बढ़ाकर 37 करने की मांग की है।