संसद सत्र के दौरान मोदी सरकार के सामने क्या है चुनौतियां

New Delhi : नरेंद्र मोदी पूरे बहुमत के साथ दूसरी बार बतौर प्रधानमंत्री चुन कर आए हैं। 303 सीटों के साथ उनके पास लोकसभा में प्रचंड बहुमत है। संसद सत्र शुरु हो गया है। 17 जून से शुरु हुए संसद सत्र में नरेंद्र मोदी के सामने कई चुनौतियां है।

संसद सत्र शुरु होते ही चुनकर आए लोकसभा सांसदों ने पद की शपथ ली। शपथ के दौरान कुछ ऐसी चीजें देखने को मिली जो आजतक संसद के इतिहास में देखने को नहीं मिली। सत्तारुढ़ पार्टी के सांसदों ने विपक्ष के नेताओँ के शपथ के दौरान जय श्रीराम और भारत माता की जय के नारे लगाए। ये नारे लगाने गलत नहीं है लेकिन संसद में ऐसे नारे लगाना वो भी तब जब संसद सद्स्य अपने पद की शपथ ले रहे थे ये संसद की गरिमा के खिलाफ है।

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी संसद में मौजूद नहीं थे। लेकिन ये सवाल उठता है कि क्या वो वहां होते तो अपने सांसदों को ऐसा करने से रोक पाते।

इन सब के इतर मोदी सरकार के सामने संसद में कई चुनौतियां हैं। लोकसभा में तो नरेंद्र मोदी के पास बहुमत है लेकिन राज्यसभा में उनके पास बहुमत नहीं है। पिछले कार्यकाल के दौरान भी राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण मोदी सरकार के कई महत्वाकांक्षी बिल पास नहीं हो पाए थे। जिनमें भूमि अधिग्रहण बिल, तीन तलाक बिल, मोटर वाहन बिल, एनआरसी बिल महत्वपूर्ण है।

माना जा रहा है कि सरकार इसी संसद सत्र के दौरान एक बार फिर से तीन तलाक बिल को पेश कर सकती है। इस बिल को लेकर विपक्ष सरकार को घेरता आया है और इसका विरोध करता आया है। ऐसे में जब राज्यसभा में अभी भाजपा के पास बहुमत नहीं है तो इस बिल को राज्यसभा में पास कराना सरकार के लिए बेहद मुश्किल होगा।

नागरिकता बिल को लेकर भी विपक्ष भाजपा पर कई सवाल खड़ें करता आया है और उसपर सांप्रदायिकता का आरोप लगाता आया है। ऐसे में इस बिल को भी पेश कराना सरकार के लिए चुनौती होगी।

पिछले कार्यकाल के दौरान इन बिलों को पास कराने की मोदी सरकार ने पूरी कोशिश की थी लेकिन राज्यसभा में उसे विपक्ष का कड़ा विरोध का सामना करना पड़ा था। इस बार भी कमोबेश वहीं स्थिति है। कम से कम एक साल तक भाजपा को राज्यसभा में बहुमत नहीं है। अगले साल यानी 2020 में राज्यसभा में कई सीटें खाली होंगी। जिनमें से भाजपा कई सीटें जीत सकती है।

वर्तमान में राज्यसभा में भाजपा के 73 सदस्य है। भाजपा के सहयोगी दलों की बात करें तो जनता दल(यू) के 6 सदस्य, अकाली दल के 3 सदस्य, शिवसेना के 3 सदस्य और आरपीआई का 1 सद्स्य राज्यसभा में है। जिन पार्टियों का भाजपा को समर्थन मिल सकता है उनमें अन्नाद्रमुक, बीजू जनता दल और टीआरएस है। इन तीनों पार्टियों की राज्यसभा में सीट जोड़ ले तो 17 सीटें भाजपा के साथ और जुड़ सकती है। इन सब को मिला लें तो भाजपा और उसके सहयोगी दलों का राज्यसभा में आंकड़ा 103 पहुंच जाता है। लेकिन फिर भी भाजपा राज्यसभा में बहुमत के आंकड़ें से दूर है।

भाजपा को राज्यसभा में तीन नामांकित सदस्यों का भी समर्थन भी मिल सकता है। इन सदस्यों में मैरी कॉम, नरेंद्र जाधव और स्वप्न दास गुप्ता शामिल है।

अप्रैल 2020 में महाराष्ट्र, असम ,झारखंड, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की 55 सीटों पर चुनाव होने हैं। माना जा रहा है कि इनमें से भाजपा 19 सीटों पर जीत सकती है। ऐसा होते हीं भाजपा राज्यसभा में बहुमत का आंकड़ा प्राप्त कर लेगी।

बहुमत हासिल होते हीं क्या-क्या फैसले ले सकती है भाजपा सरकार….

अगले साल बहुमत मिलने के बाद मोदी सरकार काफी समय से लंबित कई बिलों को लागू कर सकती हैं। जिनमें से ये प्रमुख है –

1. फाइनेंशियल बिल
2. भूमि अधिग्रहम बिल
3. तीन तलाक बिल
4. मोटर वाहन संशोधन बिल
5. कंपनी संशोधन बिल
6. नागरिकता संबंधी बिल

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जानकारों का मानना है कि राज्यसभा में बहुमत मिलने के बाद मोदी सरकार राम मंदिर और धारा-370 पर भी फैसला ले सकती है। लेकिन भाजपा कहती आ रही है कि वो राम मंदिर का मुद्दा संवैधानिक तरीके से ही सुलझाना चाहती है। अब इस पर पार्टी क्या फैसला लेगी ये तो वक्त ही बताएगा।

बहुमत मिलने के बाद भाजपा कई ऐसे फैसले भी ले सकती है जो आजतक वो लागू नहीं करा सकी है। भाजपा के बढ़ते विस्तार से अधिनायकवादी प्रवृत्ति की भी आशंका जताई जा रही है। ऐसे में महत्तवपूर्ण ये है कि विपक्ष इस दौरान अपनी भूमिका किस तरह निभाता है। विपक्ष मजबूत तो नहीं है लेकिन वो संसद में प्रतिपक्ष की भूमिका निभाकर और जनता के मुद्दे उठाकर सरकार पर दवाब जरुर बना सकता है। अगर ऐसा करने में वो नाकाम रहते हैं तो अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई भी विपक्षी दल हार जाएंगे।