शहीद राजीव थापा की मां को नहीं पता था कि देश के लिए कुर्बान हो गया उसका लाल,पिता ने सैल्यूट किया

NEW DELHI: जम्मू कश्मीर में हुई गो’लीबा’री में कालचीनी निवासी गोरखा रेजीमेंट के जवान राजीव थापा के शहीद होने की सूचना मिलते ही पूरा कस्बा गम में डूब गया।

गलियां सुनसान रहीं और कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। मां को तो पता ही नहीं कि उसका लाल शहीद हो गया है। शुक्रवार को दिन भर शहीद के घर लोगों का आना – जाना लगा रहा। शहीद का पार्थिव शरीर आज घर में आने की संभावना थी। तृणमूल अलीपुरद्वार के पूर्व अध्यक्ष एवं सिलीगुड़ी तराई डुआर्स संस्कृति डेवलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन मोहन शर्मा ने शहीद के घर पर पहुंचकर परिजनों को दुख की इस घड़ी में ढांढस बंधाया।

शहीद राजीव थापा के पिता कुमार थापा जो चाय बागान में श्रमिक हैं, को सुबह राजीव के साथियों ने फोन से राजीव के शहीद होने की सूचना दी। राजीव परिवार में इकलौता बेटा था। उसकी तीन बहने और एक आठ महीने की बच्ची है। मां रीना थापा बीमार रहती हैं।

फोन पर जैसे ही कुमार थापा को बेटे के शहीद होने की सूचना मिली, वे दोनों हाथों से अपना चेहरा ढक कर फफक पड़े। कुछ ही देर में राजीव के शहीद होने की खबर इलाके में फैल गयी और हर कदम की मंजिल राजीव का घर बन गयीं। अन्य दिनों में चहल-पहल वाली गलियां सूनी पड़ी रहीं। गलियों में लोगों की आवाजाही बहुत कम रही। गम के माहौल में लोगों के घरों में चूल्हे तक नहीं जले।