मुजफ्फरपुर कोर्ट में कमलनाथ के खिलाफ केस दर्ज, यूपी-बिहारियों के खिलाफ दिया था विवादित बयान

MP CM Kamal Nath

New Delhi: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के खिलाफ बिहार के मुजफ्फरपुर कोर्ट में केस दर्ज किया गया हैं। दरअसल, बिहार के लोगों के खिलाफ विवादित बयान देने के कारण मध्यप्रदेश के सीएम और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कमलनाथ पर केस दर्ज करवाया गया है। जानकारी के मुताबिक, बिहार के मुजफ्फरपुर कोर्ट में तमन्ना हाशिमी की ओर से कमलनाथ पर एफआइआर दर्ज करवाया गया है। मीडिया से बात करते हुए कमलनाथ ने कहा कि स्वतंत्र भारत में किसी भी राज्य का आदमी दूसरे राज्य में जाकर रह सकता है। कांग्रेस नेता के इस बयान से बिहारी अस्मिता को ठेस पहुंचा है।

आपको बता दे कि मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद मीडिया से बात करते हुए कमलनाथ ने विवादित बयान दिया था। कमलनाथ ने कहा कि सरकार की ओर से केवल उन्हीं उद्योगों को अनुदान दिया जाएगा जिनसे मध्यप्रदेश के स्थानीय लोगों को रोजगार मिले। उन्होंने कहा कि बिहार और उत्तरप्रदेश के लोग रोजगार के लिए यहां आते हैं, जिस वजह स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिलता।

कमलनाथ ने कहा कि हमने अनुदान को लेकर यह फैसला इसलिए लिया है ताकि स्थानीय लोगों को अधिक से अधिक रोजगार मिल सके। नवनियुक्त मुख्यमंत्री ने चार वस्त्र पार्क (गारमेंट पार्क) खोलने की भी घोषणा की। कार्यभार संभालने के चंद घंटों में ही कमलनाथ ने राहुल गांधी के कर्जमाफी के एलान को पूरा किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के तौर पर पहली फाइल जिसपर मैंने दस्तखत किए वो किसानों के कर्जमाफी की है, जिसका वादा हमने अपने वचनपत्र में किया था।

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आपको बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार बनने के 10 दिनों में कर्जमाफी का वादा किया था। कांग्रेस सरकार ने एक अध्यादेश जारी करके सरकारी और सहकारी बैंकों से 31 मार्च 2018 तक किसानों के 2 लाख तक के सभी कर्ज को माफ करने का आदेश जारी किया। कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा कि कम से कम 34 लाख किसानों को इसका फायदा होगा और सरकार पर 34 से 38 लाख करोड़ का बोझ पड़ेगा।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि जब बैंक बड़े उद्योगपतियों का 40 से 50 फीसदी कर्ज माफ कर देते हैं तो कोई कुछ नहीं कहता मगर जब किसानों के कर्ज माफ होते हैं तो सवाल उठते हैं। सरकार ने कन्यादान योजना के अंतर्गत मिलने वाली राशि को भी बढ़ाकर 28 हजार से 51 हजार कर दिया है। आरएसएस की शाखाओं को सरकारी संस्थानों में प्रतिबंधित होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह आदेश केंद्र और गुजरात सरकार की तर्ज पर लिया गया है और इसमें कुछ भी नया नहीं है।

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