प्लास्टिक के कचरे से ये परिवार घर पर बना रहा पेट्रोल-डीजल, रातों रात हो गए मालामाल

प्लास्टिक के कचरे से ये परिवार घर पर बना रहा पेट्रोल-डीजल, रातों रात हो गए मालामाल

By: Rohit Solanki
May 11, 20:11
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New Delhi: किसी ने बिल्कुल ठीक कहा है कि आवश्यक्ता आविष्कार की जननी होती है। हमारे घरों में प्लास्टिक की न जाने कितनी टूटी, फूटी चीजें पड़ी रहती हैं, जो न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है बल्कि हमारे स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा रहा है।

लेकिन आपके लिए जो चीजें बस कबाड़ का ढेर है वो इस परिवार के लिए मोटी आमदनी का जरिया बन गया है। जी हां, आज हम आपको एक ऐसे परिवार के बारे में बता रहे हैं, जो प्लास्टिक के कबाड़ से पेट्रोल और डीजल बनाकर बेच रहा है। इस ईंधन से न सिर्फ गाड़ी चल रही है, बल्कि जनरेटर और गैस चूल्हे में भी इसका इस्तेमाल हो रहा है।

जि‍स तरह से ये लोग बेहद कम मशीनरी का इस्‍तेमाल करते हुए प्‍लास्‍टि‍क को डीजल, पेट्रोल, केरोसि‍न और गैस में बदल रहे हैं उसने सबको हैरानी में डाल दि‍या है। इनका तरीका बेहद आसान है और कोई भी इस तरह से डीजल-पेट्रोल बना सकता है। 

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सीरि‍या के एक परि‍वार पर यह रि‍पोर्ट तैयार की है जो प्लास्टिक के कचरे से गैस और तेल बना रहा है। ये लोग सबसे पहले प्‍लास्‍टि‍क इकट्ठा करते है और अगर वह गीला है तो उसे सुखा लेते है। फिर इस प्‍लास्‍टि‍क को एक बड़े ड्रम या बॉयलर में पकाया जाता है। यह सीलबंद होता है मगर ऊपर से भाप नि‍कलने के लि‍ए एक पाइप लगा होता है। प्‍लास्‍टि‍क को अगर ऑक्‍सीजन की गैर मौजूदगी में पकाया जाता है तो वह पि‍घलने और खौलने लगता है मगर जलता नहीं है। इससे सिर्फ भाप पैदा होती है। यह भाप ऊपर लगे पाइप के जरि‍ए एक वाटर टैंक में जाती है। वाटर टैंक में सामान्‍य ताप का पानी भरा होता है। 

भाप से बनता है लि‍क्‍वि‍ड : बॉयलर से आ रहे पाइप का आखि‍री छोर पानी में डूबा रहता है। यह भाप पानी में आती है और लि‍क्‍वि‍ड में तब्‍दील हो जाती है। यह लि‍क्‍वि‍ड पानी से हल्‍का होता है इसलि‍ए वो पानी के ऊपर तैरता रहता है और इकट्ठा होता जाता है। यहां से तेल को नि‍कालने के लि‍ए एक पाइप लगा होता है, जि‍सका मुंह पानी के लेवल से जरा सा ऊपर होता है। जब तेल इकट्ठा होता है वो पानी के लेवल से ऊपर भरने लगता है और इस पाइप के जरि‍ए दूसरे टैंक में जमा होता जाता है।

लि‍क्‍वि‍ड से बनता है डीजल पेट्रोल : दूसरे टैंक में जमा हुआ यह लि‍क्‍वि‍ड ही ईंधन है। यह ईंधन साफ नहीं होता है। इसे आग लगाने के काम में आसानी से इस्तेमाल कि‍या जा सकता है,  मगर रि‍फाइन करने के बाद यही लि‍क्‍वि‍ड डीजल, पेट्रोल और केरोसि‍न में तब्‍दील हो जाता है। रॉयटर्स ने सीरि‍या के एक परि‍वार की बताई है जो इसी तरीके ईंधन बनाकर बेच रहा है।

तब भी बच जाती है गैस: बॉयलर से नि‍कली सारी गैस तेल में नहीं बदलती कुछ गैस उसी तरह रह जाती है। यह गैस भी जलने वाली होती है। इसे इकट्ठा करने के लि‍ए वाटर टैंक के ऊपरी हि‍स्‍से में एक पाइप लगा होता है। इस पाइप के जरि‍ए गैस को दूसरी जगह जमा कर लि‍या जाता है। यह गैस वैसे ही जलती है जैसे LPG या नेचुरल गैस। 

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