हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल है बूढा अमरनाथ मंदिर, यहां मुसलमान करते हैं मंदिर की देखभाल

New Delhi : 1 जुलाई से पवित्र अमरनाथ की यात्रा शुरूहो रही है लेकिन क्या आपको पता है जम्मू में भी एक अमरनाथ विराजमान हैं जी हां जम्मू में भी भगवान शिव से जुड़ा एक और तीर्थ स्थल है। जिसे बूढा अमरनाथ के नाम से जाना जाता है। यह पवित्र स्थान जम्मू से 235 किमी दूर पुंछ जिले के राजापुर मंडी में स्थित है।

बाबा बूढा अमरनाथ जी के दर्शनों को आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी हो रही है। स्वामी चंद्र चुड़ मनी जी ने बूढा अमरनाथ जी के एतिहासिक शिवलिंग को उजागर किया था। यहीं पर उन्होंने समाधि भी ले ली। उनकी समाधि अभी भी शिवलिंग से थोड़ी दूरी पर स्थित है।

ऐतिहासिक है बूढा अमरनाथ का मन्दिर : पाकिस्तानी क्षेत्र से तीन ओर से घिरी सीमावर्ती पुंछ घाटी के उत्तरी भाग में पुंछ कस्बे से 23 किमी की दूरी पर स्थित बूढा अमरनाथ का मंदिर सांप्रदायिक सौहार्द की कथा भी सुनाता है जो इस क्षेत्र में है। वैसे यह भी कहा जाता है कि भगवान शिव ने कश्मीर में स्थित अमरनाथ की गुफा में माता पार्वती को जो अमरता की कथा सुनाई थी उसकी शुरुआत बूढा अमरनाथ के स्थान से ही हुई थी

साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है बूढा अमरनाथ – यह मान्यता है कि इस मंदिर के दर्शनों के बिना अमरनाथ की कथा ही नहीं, बल्कि अमरनाथ यात्रा भी अधूरी है। कितने आश्चर्य की बात है कि हिन्दुओं का धार्मिक स्थल होने के बावजूद इसके आसपास कोई हिन्दू घर नहीं है और इस मंदिर की देखभाल आसपास रहने वाले मुस्लिम परिवार तथा सीमा सुरक्षा बल के जवान ही करते हैं।

सबसे खास बात ये है कभी इस स्थान तक पहुँचने के लिए किसी प्रकार की पैदल यात्रा नहीं करनी पड़ती है, और जिसके साथ ही कश्मीर का क्षेत्र तथा बहुत ही खूबसूरत लोरन घाटी लगती है। बूढा अमरनाथ का मंदिर चकमक पत्थर से बना हुआ है। यह सभी अन्य शिव मंदिरों से पूरी तरह से भिन्न है। मंदिर की चारदीवारी पर लकड़ी के काम की नक्काशी की गई है जो सदियों पुरानी बताई जाती है। मंदिर के एक ओर लोरन दरिया भी बहता है जिसे पुलस्त्य दरिया भी कहा जाता है और उसका पानी बर्फ से भी अधिक ठंडक लिए रहता है।