पर्यावरणविद की याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट में हुई स्वीकार, तटीय इलाके में निर्माण कार्य पर लगी रोक

New Delhi: पर्यावरणविद की जनहित याचिका को स्वीकार करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी के प्रोजेक्ट पर ताला लगा दिया है। अपने फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि मुंबई के समुद्री इलाके में निर्माण कार्य सही नहीं है। इस निर्माण कार्य के लिए बीएमसी ने इजाजत नहीं ली है। मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नादराजोग और न्यायमूर्ति एन एम जामदार ने तटीय नियमन क्षेत्र की अनुमति को र’द्द कर दिया और नए सिरे से पर्यावरणीय मंजूरी भी मांगी।

पर्यावरणविद आर्किटेक्ट श्वेता वाघ ने कहा कि यह चौंकाने वाला है कि बीएमसी इस परियोजना के बिना अध्ययन के आगे बढ़ी। मछुआरों की आजीविका के लिए इन्होंने किसी भी प्रकार की चिंता नहीं है। एक अन्य याचिकाकर्ता, वनशक्ति के निदेशक, पर्यावरणविद् स्टालिन डी ने कहा कि बीएमसी ने पहले पूरी तरह से अलग योजना दिखाई थी। बाद में अपनी सुविधा के अनुसार इसे बदल दिया।

उन्होंने कहा कि हम यह भी निश्चित करते हैं कि बीएमसी जल्द ही इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी और हम उस ल’ड़ाई के लिए भी तैयार हैं। समुद्री उत्साही शौनक मोदी जो मुंबई (एमएलओएम) के समुद्री जीवन का हिस्सा है, ने कहा कि तटीय सड़क अलग-अलग तटों को अलग तरह से प्रभावित करेगी।

महालक्ष्मी और वर्ली जैसे तटों पर निर्माण होने के कारण हजारों समुद्री प्रजातियों की मौ’त हो जाएगी। बीएमसी भी अपनी पूरी टीम के साथ सुनवाई के लिए पहुंची थी। खांबता और एस जी जैसे दो बड़े पूर्व के वकील के साथ-साथ वरिष्ठ सलाहकार मिलिंद साठे और अनिल साखरे इस सुनवाई में मौजूद थे।