राजकुमार के दमदार डालॉग से सुपरहिट हो गई थी सौदागर, फिल्म के 27 साल पूरे होने पर जानिए अनसुने किस्से

राजकुमार के दमदार डालॉग से सुपरहिट हो गई थी सौदागर, फिल्म के 27 साल पूरे होने पर जानिए अनसुने किस्से

By: Kalpana
August 10, 08:55
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New Delhi: बॉलीवुड फिल्में कई बार अमर हो जाती हैं। सुनहरे दौर में आईं कुछ फिल्मों को आज भी याद रखा जाता है। ऐसी ही एक फिल्म है सौदागर।

1973 में फिल्म आई थी सौदागर अमिताभ बच्चन और स्मिता पाटिल की। इस फिल्म में दोनों ने कमाल का अभिनय किया। फिर 18 साल बाद 1991 में शो मैन सुभाष घई इसी टाइटल के साथ लेकर आए एक और फिल्म।

कहानी दो जिगरी दोस्तों की, जो दुश्मनी में बदल जाती है। सौदागर फिल्म में राजकुमार लीड रोल में थे। सौदागार फिल्म को लोगों ने भरपूर प्यार दिया था। फिल्म में राजकुमार के डालॉग और गाने जमकर हिट हुए थे। फिल्म में राजकुमार के डायलॉग को आज भी लोग याद करते हैं।

जब राजेश्वर दोस्ती निभाता है तो अफसाने लिक्खे जाते हैं..
और जब दुश्मनी करता है तो तारीख़ बन जाती है।

जानी.. हम तुम्हे मारेंगे, और ज़रूर मारेंगे.. लेकिन वो बंदूक भी हमारी होगी,
गोली भी हमारी होगी और वक़्त भी हमारा होगा।

शेर को सांप और बिच्छू काटा नहीं करते..
दूर ही दूर से रेंगते हुए निकल जाते हैं।

काश कि तुमने हमे आवाज दी होती तो हम मौत की नींद से भी उठकर चले आते।

फिल्म से जुड़े किस्से भी गजब हैं। सुभाष घई जब इस फिल्म की कास्टिंग के लिए दिलीप कुमार और राज कुमार के पास गए थे, उस वक्त बहुत मजेदार वाकये हुए थे। सुभाष घई ने एक इंटरव्यू में बताया था कि इन दोनों लीजेंड्री एक्टर्स को फिल्म में काम करने कैसे तैयार किया था।

राजकुमार को मनाने में लगे थे 2 घंटे शूटिंग पर पहुंचते ही राजकुमार ने देखा, दिलीप कुमार यूपी-बिहारी लहजे वाली हिन्दी में बात करते हैं। जबकि राजकुमार को रेग्युलर हिन्दी बोलना थी। सुभाष घई ने इस बारे में उन्हें नहीं बताया था, जिससे राजकुमार गुस्सा हो गए और घई से कहा कि वे फिल्म छोड़कर वापस मुंबई जा रहे हैं। सुभाष को राजकुमार को मनाने में दो घंटे लगे थे। उन्होंने राजकुमार से कहा कि दिलीप कुमार फिल्म में गरीब परिवार से हैं, जबकि राजकुमार एक रॉयल फैमिली से इसलिए लहजे में फर्क रखा है।

सौदागर जिस दिन रिलीज हुई थी, उस दिन डेब्यू एक्टर विवेक मुश्रान का बर्थडे था। हालांकि विवेक से पहले यह रोल आमिर को ऑफर किया गया था। आमिर ने रोल छोटा होने के कारण करने से इंकार कर दिया था। साथ ही वासु के रोल के लिए चंद्रचूड़ सिंह ने भी ऑडिशन दिया था। मनीषा कोइराला के रोल के लिए दिव्या भारती को चुना गया था। कम उम्र के कारण दिव्या को रिप्लेस किया गया। फिर मनीषा कोइराला के लिए यह फिल्म सुपरहिट हो गई।

32 साल बाद राजकुमार और दिलीप कुमार एक साथ काम करने को राजी हुए थे। दोनों पहले फिल्म पैगाम में नजर आए थे। 1959 में आई फिल्म के 32 साल बाद तक किसी ने भी दोनों के साथ फिल्म बनाने की कोशिश नहीं की। खुद सुभाष घई ने भी दिलीप कुमार से जब राजकुमार के बारे में बताया कि वे उनके दोस्त की भूमिका में हैं, तब वे अपनी कार में बैठे थे। राजकुमार का नाम बताने के बाद वे वहां से भाग गए थे।

बहरहाल आज फिल्म को 27 साल रिलीज हुए हो गए हैं। पर आज भी सौदागर दर्शकों की चहेती फिल्म है। फिल्म का गाना इमली का बूटा बेरी का पेड़ सुपरहिट रहा है। दोस्ती यारी की ये मिसाल लोगों में रूमानी जज्बा पैदा कर देती है।

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