दुनिया का सबसे हल्का बुलेटप्रूफ ‘भाभा कवच’ होगा अब सेना के पास,छू भी नहीं पायेगी दुश्मन की गोली

New Delhi : भारतीय सेना के जवानों को बहुत जल्द ऐसा सुरक्षा कवच मिलने वाला है, जिसे दुश्मनों की गोलियां भी नहीं भेद पाएंगी। इस सुरक्षा कवच का नाम है भाभा कवच। ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) को लगभग दो लाख ‘भाभा कवच’ बनाने के लिए निर्देश प्राप्त हुए हैं। सरकार “मेक इन इंडिया” को बढ़वा देने के लिए और भारतीय उत्पाद की मांग आयात पर निर्भरता को समाप्त करने के लिए यह कदम उठाया है। भाभा रक्षा कवच देश का सबसे हल्का बुलेट-प्रूफ जैकेट है।

भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित एक ऐसी जैकेट है जो स्टील की गोली से देश की जवानों की रक्षा करेगा। इस जैकेट को चीन में निर्मित स्टील की गोली भी भेद नहीं पाएगी जो सामान्य जैकेट को आसानी से भेद देती है। यह जैकेट एसएलआर और एके-47 राइफ़लों से निकलने वाली हर गोली को विफल करने में सक्षम है। इस जैकेट का वजन 6.6 किलो है जबकि सामान्य बुलेट प्रूफ़ जैकेट का वजन 10 किलो या उससे अधिक होता है।सेना द्वारा इस तरह की 50 हज़ार जैकेट ख़रीदी जानी है और अभी 24 हज़ार ख़रीदी जा चुकी हैं।

भाभा कवच का निर्माण पुरी तरह से स्वदेशी तकनीक से हुआ है। भारत में हुए कई आतंकवादी हमलों (जैसे-उरी, पुलवामा) को ध्यान में रखते हुए , भारतीय सुरक्षा बलों की सुरक्षा हेतु एक उन्नत, कुशल और लागत प्रभावी सुरक्षा प्रणाली विकसित करने की सख्त आवश्यकता है जो 21वीं सदी के संभावित खतरों से तेज़ी से निपट सके।

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल जैसे- केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, और सशस्त्र सीमा बल; जो हमारे सीमाई क्षेत्रों को सुरक्षित करते हैं इसलिये भाभा कवच को निम्नलिखित हथियारों से भारतीय सुरक्षा बलों की रक्षा हेतु डिज़ाइन किया गया है। भाभा कवच हर टेस्ट में खरा उतरा है। भारतीय सेना और पैरामिलिटरी फोर्सेस में बड़ी संख्या में बुलेट प्रूफ जैकेट की मांग है। साल में लगभग 1 लाख से भी ज्यादा की जरूरत है।