अब क्षेत्रीय भाषाओं में भी दे सकेंगे बैंकिंग की परीक्षा : निर्मला सीतारमण

New Delhi: अब बैंकिंग की परीक्षा देने वालों पर किसी भी प्रकार की भाषा संबंधी सीमाएं नहीं रहेंगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भाषा संबंधी पाबंदियां हटा दी हैं। अब बैंकिंग की परीक्षा में भाषाओं के चयन में पहले जैसी बाधा सामने नहीं आएंगी। हिन्दी और अंग्रेजी के अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में भी परीक्षा लिखने का मौका दिया जाएगा। बैंकिंग की परीक्षाएं अब क्षेत्रीय भाषाओं में भी आयोजित की जाएंगी।

लोकसभा सत्र के दौरान वित्त मंत्री क्षेत्रीय भाषाओं में बैंकिंग की परीक्षाएं आयोजित करने की सहमति दे दी है। सीतारमण ने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर भी युवाओं को रोजगार के बराबर अवसर देने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है। बैंकिंग की परीक्षाएं अब 13 क्षेत्रीय भाषाओं में भी आयोजित होंगी। बंगाली, गुजराती, कन्नड़, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, उड़िया, पंजाबी, तमिल, तेलुगू, ऊर्दू और असमी भाषाओं में परीक्षार्थी परीक्षा दे सकेंगे।

कर्नाटक सहित दक्षिण भारतीय राज्यों के सांसदों ने इस मुद्दे पर अपनी मांग उठाई थी। राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान कांग्रेस के जी सी चंद्रशेखर ने स्थानीय भाषा में भी परीक्षाएं आयोजित करने की मांग की थी। इस पर सीतारमण ने कहा था कि ‘यह गंभीर चिंता का विषय है। मैं इसे देख रही हूं और इस पर विचार करने के बाद मैं सदन को अवगत कराऊंगी।’

बैंक परीक्षाओं को क्षेत्रीय भाषाओं में कारने की मांग ट्विटर पर भी ट्रेंड हो रही थी। बड़ी संख्या में छात्र इसकी मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि ऐसा करने से क्षेत्रीय भाषाओं के परीक्षार्थियों को लाभ होगा।