भारतीय बैंक फ्रॉ’ड केस दर्ज करवाने से हैं घबराते, इज्जत बचाने के चक्कर में पैसा हैं डूबाते

New Delhi : बैंकों में लोन के लेन देन से बहुत सारे फ्रॉ’ड के केस सामने आ रहे हैं। सबसे ज्यादा उनमें कॉर्पोरेट फ्रॉ’ड शामिल हैं। बहुत बार ऐसा हुआ कि बैंको को पहले से ही धां’धली का पता चल गया मगर किसी कारण से उन्होंने उसे रिपोर्ट नहीं किया।

हाल ही में हुए बैंकर्स सम्मेलन में एक बैंकर वहां इकट्ठा हुए पत्रकारों के साथ एक जोक साझा कर रहा था। वो मजे लेते हुए कहता है कि अगर आप बैंक से 1 लाख का लोन लेते हैं तो वो आपकी प्रॉब्लम है वहीं अगर आप बैंक से 100 करोड़ का लोन लेते हैं तो वो बैंक की प्रॉब्लम है।

बैंकर ने ये तंज भारतीय बैंकिंग सिस्टम पर कसा है। हमारे सिस्टम में लोग बैंक से लोन लेते जा रहे हैं। एक के बाद एक कर्जा बैंक पर बढ़ रहा है। RBI के एक डाटा के अनुसार भारतीय बैंकों में 6,801 फ्रॉ’ड चल रहे हैं जिनमें लगभग 71,500 करोड़ रुपया फंसा हुआ है।

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अरुणधति भट्टाचार्य के अनुसार जितने भी फ्रॉ’ड हुए हैं वो ज्यादातर क्रेडिट से जुड़े हैं ना वो ब्लैक हैं ना वो व्हाइट हैं बल्कि ऑपरेशनल फ्रॉ’ड हैं। कंपनी के गिरने के पीछे का असली कारण क्या है इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है। मैनेजमेंट से लेकर हर तरह के डिपार्टमेंट को घेरे में लेकर भी असली कारण पता नहीं लगाया जा सकता।

साइबर फ्रॉ’ड पर रोक लगाना बहुत आसान है मगर बैंक अपनी इमेज बचाने के चक्कर में देर कर देते हैं जिसका खामियाजा उससे जुड़े हर स्टेकहॉल्डर को भुगतना पड़ता है। इस तरह धां’धली चलती जाती है।