देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में शामिल है बाबाधाम, सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़

NEW DELHI : भारत के झारखण्ड राज्य की एक जगह है DEVGARH, जहां हिन्दुओं के आराध्य भगवान शिव का प्रसिद्ध तीर्थस्थल है जो शिव भक्तों के बीच BABADHAM के नाम से लोकप्रिय है । देवघर शब्द का निर्माण दो शब्दों देव+घर से मिलकर हुआ है, जिसमें देव का अर्थ देवी-देवताओं से है और घर का अर्थ निवास स्थान से है अर्थात जो स्थान देवी-देवताओं के रहने का स्थान होता है वही देवघर कहलाता है । देवघर वैद्यनाथ धाम के नाम से भी सारे विश्व में प्रसिद्ध है ।यहां बाबा भोलेनाथ का अत्यंत पवित्र और भव्य मंदिर है। हर साल सावन महीनें में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है जो “बोल-बम- बोल-बम” , “बोल-बम का नारा है ,बाबा एक सहारा है” और “बम-बम बोले” जैसे प्रसिद्ध नारों की गूंज लगाते हुए शिव भक्त बिहार के सुल्तानगंज से गंगा नदी से गंगाजल लेकर 105 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करके देवघर में भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं। देवघर पूरे विश्व में शान्ति और भाई-चारे का प्रतीक है ।यहां जो बाबा बैद्यनाथ  का  मंदिर है, वह पूरे भारत के जो 12 शिव भगवान के ज्योतिर्लिंग हैं, उनमें से एक है ।देवघर के बैद्यनाथ मंदिर में शिवलिंग कैसे स्थापित हुई, इसका उल्लेख पुराणों में मिलता है,जिसके अनुसार लंका नरेश रावण चाहता था कि लंका पर भगवान शिव का आशीर्वाद हमेंशा बना रहे।  अपनी इस मनोकामना को पूरी करने के लिए वह लंका से आकर कैलाश पर्वत पर शिवलिंग के सामने खड़ा होकर तपस्या करने लगा लेकिन तपस्या के बावजूद जब भगवान प्रकट नहीं हुए तो रावण अपनी  सिर की बली चढ़ाने लगा। इस तरह वह अपने दस सिरों में से 9 सिर बली चढ़ा दिया । अब दसवां सिर चढ़ाने ही वाला था कि भगवान शिव ने शिवलिंग से प्रकट होकर उसके नौं सिर ज्यों का त्यों कर वरदान मांगने को कहा , जिसके बाद रावण ने शिवलिंग को लंका ले जाने की मांग की। इस पर शिव ने शर्त लगाते हुए अनुमति दे दी और कहा कि आप  लंका वापस लौटते वक्त शिवलिंग को कहीं नीचे धरती पर नहीं रखेंगे, यदि रखेंगे तो वहीं शिवलिंग सदैव के लिए स्थापित हो जाएगा। देवतागण अपने शत्रु को मिले इस वरदान से घबरा गए और एक योजना के तहत भगवान विष्णु बालक के रुप में रावण के सामने प्रकट हो गए। इसी समय रावण को पेशाब लगा और उसने बालक बने विष्णु से अनुरोध किया कि शिवलिंग को अपने हाथों में थामकर रखे,तब तक वह पेशाब करके आता है । रावण के पेट में गंगा समा गई थी, इसके कारण रावण लम्बे समय तक मूत्र विसर्जन करता रहा। इसी बीच विष्णु ने शिवलिंग को धरती पर रख दिया। रावण जब मूत्र त्याग करके लौटा तो शिवलिंग को धरती पर रखा देख बहुत क्रोधित हुआ। रावण ने  शिवलिंग को उखाड़ने का बहुत प्रयास किया, लेकिन वह टस से मस नहीं हुई। क्रोध में आकर रावण ने शिवलिंग पर पैर से एक लात मारी, जिससे शिवलिंग भूमि में और धस गयी। यही शिवलिंग आगे चलकर बाबा बैद्यनाथ धाम के रुप में जाना गया । इस बाबा बैद्यनाथ के मंदिर के पास दो तालाब हैं, जिसमें से एक तालाब में कोई स्नान नहीं करता। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह तालाब रावण के मूत्र से बना है ।वहीं दूसरे तालाब में लोग स्नान करके बाबा को जल चढ़ाते हैं।