बीजेपी नेताओं को सता रही चिंता, राम मंदिर पर बेहद कम ‘शहरी लोग’ दे रहे समर्थन

New Delhi: अयोध्या विवाद में अब सुप्रीम कोर्ट 29 जनवरी को मामले की सुनवाई करेगी। राम मंदिर पर तारीख पर तारीख मिलने से अब करोड़ो लोगों की बेचैनी बढ़ने लगी हैं। वहीं राम मंदिर बनाने का वादा करने वाली बीजेपी पर भी दवाब पड़ने लगा हैं। इस कड़ी अब बीजेपी नेताओं को एक चिंता खाई जा रही हैं। दरअसल, राम मंदिर के मामले को लेकर बीजेपी नेताओं में चिंता हैं। राम मंदिर मुद्दे को ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादा समर्थन मिल रहा हैं जबकि शहरी क्षेत्र में मुद्दे को कम समर्थन हैं। इसकी बात को लेकर बीजेपी नेता चिंता में हैं।

वहीं तारीख मिलने पर अयोध्या में रामलला मंदिर के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने नाराजगी जताई।  पुजारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में तारीख पर तारीख से निराशा हुई, आज हमें बहुत उम्मीद थी। सरकार से बहुत आशा थी लेकिन वहां से भी निराशा हुई। ऐसा लगता है कि रामलला का ‘वनवास’ से लौटना अनिश्चित है। आपको बता दें कि पांच जजों की पीठ में जस्टिस यूयू ललित शामिल नहीं होंगे। उन्होंने खुद को इस बेंच से अलग कर लिया है। अब नई बेंच का गठन किया जाएगा।

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इस पर वीएचपी नेता आलोक ने कहा कि हमको पहले से आशंका थी कि विपक्ष पहले से ऐसा कुछ करेगा, जिससे मामले की सुनवाई आगे टल जाये। ये मामला उठाना कि बेंच गठित पर सवाल खड़े करना बेतुका हैं। उन्होंने कहा कि जस्टिस ललित का मामला भी बेकार में उठाया गया। वो इन अपीलों में कभी पेश नहीं हुए, वो इन मुकदमों में कभी पेश नहीं हुए। वो कल्याण सिंह के लिए पेश हुए, इससे वह बेंच में रहने के लिए अक्षम साबित नहीं होते।

उन्होंने कहा कि हमने कानून से आशा छोड़ दिया हैं और अब धर्मसभा ही तय करेगी कि राम मंदिर को लेकर अगला कदम क्या होगा। वहीं उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने कहा कि नया फॉर्मुला सामने आया और फिर केस को आगे बढ़ा दिया गया। उन्होंने कहा कि क्यों बाबरी पक्षकार मेरिट पर बहस नहीं करना चाहता ?, जस्टिस ललित पर सवाल उठाकर एक बार फिर बेंच गठित होगी। पूरा देश कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहा हैं, कब तक भागेंगे…