असम सरकार बना रही है राज्य में पशु एंबुलेंस शुरू करने की योजना

New Delhi: हम सभी अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य को लेकर तो अक्सर चिंतित रहते हैं लेकिन भला उन जानवरों का क्या जो बोल नहीं सकते और अपना ध्यान खुद नहीं रख सकते। क्या उनका ध्यान रखना हमारा फर्ज नहीं? इसी बात को समझते हुए असम सरकार राज्य में घा’यल और मृ’त पशुओं के लिए एंबुलेंस सेवा शुरू करने की योजना बना रही है। कृषि, पशुपालन और पशु चिकित्सा मंत्री अतुल बोरा ने इसकी जानकारी दी।

मंत्री ने बताया कि 108 एंबुलेंस सेवा के तहत अभी इसके लिए एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है जिसमें 6 एंबुलेंस हैं। इस एंबुलेंस में पशु चिकित्सक और अन्य कर्मचारी होंगे। राज्य मंत्री ने बताया कि अभी ये पायलट प्रोजेक्ट असम राज्य के दूरदाज और आतंरिक क्षेत्रों में शुरू किया गया है जहां पर पशु चिकित्सकों की सेवाएं आसानी से नहीं मिलती।

अगर पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो इसे राज्य भर में लागू कर दिया जाएगा। 2012 में 19 वीं पशुधन जनगणना के अनुसार असम में 19.8 मिलियन मवेशी, 4,35,270 भैंस, 5,18,070 भेड़, 6.1 मिलियन बकरियां, 14,150 घोड़े, 1,050 गधे, 1.63 लाख सूअर, 5,27,520 घरेलू कुत्ते और 450 घरेलू हाथी हैं।

राज्य और पूरे भारत में 20 वीं पशुधन जनगणना चल रही है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार असम में 1,517 पशु चिकित्सा पॉलीक्लिनिक्स, अस्पताल, औषधालय और प्राथमिक चिकित्सा केंद्र हैं।

अगर ये योजना सफल रहती है तो इसे सिर्फ असम राज्य में ही नहीं बल्कि पूरे भारत में लागू करना चाहिये क्योंकि पशु भी हमारी संपत्ति हैं और सिर्फ उनसे लाभ लेना भर ही हमारा मकसद नहीं होना चाहिये जब हम उनसे लाभ कमाते हैं तो इसी के साथ हमे उनकी देखभाल के लिए भी उतना ही सजग रहना चाहिये।