जन्म से पहले पिता हुए शहीद,मां भी चल बसी-अपने दम पर सेना में अफसर बनी शहीद की बेटी आशा गुर्जर

New Delhi : बेटियां कैसे अपने मां बाप का नाम रौशन करती हैं इसका उदाहरण हैं आशा गुर्जर। आशा जब जन्मी भी नहीं थी तो पिता राय स्वरूप गुर्जर ऑपरेशन रक्षक में सीमा पर लड़ते हुए शहीद हो गए थे। दुनिया में आई तो केवल मां का साया दिखा। लेकिन बड़ी होकर सपने देखने शुरू किए तो मां भी छोड़ चल बसीं।

आशा ने उम्मीदों को नहीं छोड़ा और पिता के आतंकियों से लड़ने की वीर गाथाएं सुनते पढ़ते उनका आशा ने सेना में जाना तय किया। आशा अब सेना में डॉक्टर बनी है। इकलौती बेटी के सेना में डॉक्टर बनने से शहीद के सूने आंगन में फिर से रोशनी जगमगाने लगी है। झूंझुनू के चिड़ावा के पास स्थित छोटे से गांव में 1993 में जन्मी आशा की आठवीं तक की पढ़ाई गांव में हुई। उनका सहारा मां को पक्षाघात हुआ तो उनके साथ आशा जयपुर आई जहां सेना की तरफ से सांझी छत में रहने पढ़ने की व्यवस्था की गई।

आशा की मां फरवरी 2016 में आशा को अकेला छोड़ रुख़सत हो गई। आशा ने हिम्मत नहीं हारी और 2010 से चल रही अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई को पूरी किया। पढ़ाई पूरी होते ही उनका हाल ही सेना में डॉक्टर के पद पर चयन हुआ है। सेना में आर्मी मेडिकल कोर में कमिशन प्राप्त होने के साथ आशा के साथ अच्छी बात यह रही कि सैनिक अस्पताल जयपुर में ही पदस्थापित हुई।