अपील बेअसर : ईद पर हजारों की संख्या में खरीददारी के लिये निकले मुसलमान, बेबस दिखी पुलिस

New Delhi : मुंबई हो या दिल्ली। ईद पर हर शहर में सरकारों की अपील बेअसर हो गई। रविवार 24 मई को ईद के कारण काफ़ी चहल-पहल रही। सोशल डिस्टेनिंग की जम कर धज्जियाँ उड़ाई गईं और बाजारों में कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए सरकार द्वारा घोषित लॉकडाउन का खुलेआम उल्लंघन किया गया। ईद की ख़रीददारी के लिए हज़ारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और उन्होंने कोरोना संक्रमण के प्रसार का डर और भी बढ़ा दिया।

इस तरह का नज़ारा दिल्ली के जामा मस्जिद में दिखा। समाचार एजेन्सी एएनआई ने जो तस्वीरें जारी की हैं, उसमें हजारों की भीड़ नजर आ रही है। मुम्बई के भिंडी बाजार में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। भिंडी बाजार में बड़ी संख्या में ईद की ख़रीददारी के लिए निकले लोगों ने सोशल डिस्टैन्सिंग का पालन करने से इनकार कर दिया। हालाँकि, उलेमाओं और मजहबी नेताओं से अपील करवाई गई थी कि मुसलमान ईद की नमाज घर में ही पढ़ें और बाहर न निकलें। बावजूद इसके मुंबई, दिल्ली और बाकी शहरों के रोजदारों ने उनकी बातें नहीं सुनीं।

जब बाजारों में इतनी बढ़ी भीड़ जुटी, तब वहाँ पुलिस भी मौजूद थी। पुलिस की मौजूदगी में ही लोग बेख़ौफ़ ख़रीददारी करते रहे। जब बाजार में लोगों को लॉकडाउन और सोशल डिस्टैन्सिंग का पालन करने की सलाह दी जा रही थी तो उन्होंने कहा कि साल में एक बार तो ईद का त्योहार आता है, क्या वो ये भी न करें? जबकि विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि इस बार ईद के मौके पर लोगों को गले मिलने से परहेज करना चाहिये और फ्लाइंग किस और फ्यिंग हैंड शेक के जरिये एक-दूसरे का अभिवादन स्वीकार करना चाहिये। ऑल इंडिया जमात फेडरेशन ने अपील की है कि इस बार नये कपड़े ख़रीदने की बजाय मुस्लिम परिवार ज़रूरतमंदों की मदद करें।

दुनिया भर में लोग ईद में बाहर न निकले की अपील कर रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका की मुस्लिम न्यायिक परिषद (MJCSA) ने यह कहते हुए मुसलमानों को पारंपरिक सभाओं और समारोहों में शामिल होने के लिए सचेत किया है कि अगर इस ईद में दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जाएगा तो संभावित रूप से यह महामारी दोगुनी गति से फैल सकती है।

इधर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ईद के मौके पर मस्जिद और ईदगाह खोलने के मामले में दखल देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि पहले यूपी सरकार से मस्जिदें खोलने की अर्जी लगाई जाए, यदि वहाँ खारिज कर दिया जाता है, या फिर लटकाए रखा जाता है तभी वह हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं। बिना सरकार को अर्जी दिए सीधे हाईकोर्ट में याचिका दायर नहीं की जा सकती। इस तरह से सीधे हाईकोर्ट आना ठीक नहीं है।

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