ओडिशा के नक्सल प्रभावित जिले मलकानगिरि की बेटी अनुप्रिया लकड़ा ने पायलट बनकर रचा इतिहास

New Delhi: ओडिशा के नक्सल प्रभावित मलकानगिरी जिले में रहने वाली, 27 वर्षीय अनुप्रिया लकड़ा ने पिछड़े क्षेत्र से पहली महिला पायलट बनकर इतिहास रचा है। गरीबी में अपनी जिंदगी जी रहे लोगों के लिए अनुप्रिया आशा की एक किरण बन चुकी हैं।

अनुप्रिया जल्द ही सह-पायलट के रूप में निजी एयरलाइन में शामिल होंगी। लकड़ा ने वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद यह उपलब्धि हासिल की है। 23 साल की उम्र में, उन्होंने इंजीनियरिंग छोड़ने और पायलट बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए विमानन अकादमी में शामिल होने का फैसला किया।

उनकी उल्लेखनीय उपलब्धि पर शुभकामनाएं देते हुए, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने एक ट्वीट में कहा था कि लकड़ा दूसरों के लिए अनुकरणीय उदाहरण स्थापित करके एक प्रेरणा बन गई हैं।

पटनायक ने ट्वीट किया, “मैं अनुप्रिया लकड़ा की सफलता के बारे में जानकर खुश हूं। उनके द्वारा समर्पित प्रयासों और दृढ़ता से हासिल की गई सफलता कई लोगों के लिए एक मिसाल है।”

अनुप्रिया के पिता मारिनियास लकड़ा ओडिशा पुलिस में एक हवलदार हैं और मां जामज यास्मिन लकड़ा गृहणी हैं। लकड़ा ने मलिकगिरी में एक कॉन्वेंट से अपनी मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की और सेमीलीगुडा के एक स्कूल से हायर सेकंडरी की पढ़ाई पूरी की। उसके बाद भुवनेश्वर स्थित एक इंजीनियरिंग कालेज में नाम लिखाया। हालांकि पायलट बनने की कोशिश के चलते उसने इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। इसके बाद अपने पायलट का सपना पूरा करने के लिए भुवनेश्वर के गोची इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग के लिए आवेदन किया।

उनके अभिभावक उनकी इस उपलब्धि को लेकर खुश हैं। उन्होंने बताया कि यह लकड़ा के लिए आसान यात्रा नहीं थी। इस स्तर तक पहुंचने के लिए अनुप्रिया ने बहुत संघर्ष किया।

अनुप्रिया लकड़ा की माँ ने एएनआई को बताया, “लोग कहते थे कि वह ऐसा नहीं कर पाएगी क्योंकि हम एक पिछड़े हुए गाँव के हैं। लेकिन उसने उन्हें गलत साबित कर दिया है। हमें उस पर गर्व महसूस हो रहा है।”

उन्होंने कहा कि पूरा परिवार उनकी सफलता का जश्न मना रहा है।

आदिवासी क्षेत्र से पहली महिला वाणिज्यिक पायलट बनने के लिए लकड़ा की तारीफ सोशल मीडिया पर भी हो रही है।

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