Anti Tabacco Day : तंबाकू को न जाने दें अपनी सांसों में 

New Delhi

who के अनुसार , हर साल करीब छह लाख लोगों की मौ’त तंबाकू से होती है।

भारत में तंबाकू की शुरूआत 17 वीं शताब्दी में हुई थी। 19 वीं शताब्दी आते- आते यह फेफडों के कैंसर की बड़ी वजह के रूप में सामने आ गई। आजकल लोग सिगरेट और तंबाकू का प्रयोग इसलिए भी करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है  कि इससे व्यक्ति आधुनिक हो जाता है।

पूरे विश्व में इस समय, 15 साल या उससे ज्यादा उम्र के 942 लाख आदमी और 175 लाख औरतें धूम्रपान करती हैं। जिसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन  की रिपोर्ट के अनुसार हर साल लगभग 6 लाख लोगों की मौ’त हो जाती है।  इस रिपोर्ट से यह भी सामने आया है कि 5 लाख लोग सीधे तंबाकू के सेवन के कारण म’रते हैं जबकि 6,00,000 से ज्यादा लोग ऐसे होते हैं जो नशा नहीं करते  हैं सिर्फ धुंए के संपर्क में आने से म’र जाते हैं।

इसलिए तंबाकू के उल्टे प्रभाव के कारण हर छह सेकंड में एक व्यक्ति की मृ’त्यु हो जाती है। भारत में लगभग 35% वयस्क (47.9% पुरुष और 20.3% महिलाएं ) किसी न किसी रूप में तंबाकू का  उपयोग करती हैं। तम्बाकू का सेवन सिगरेट, बीड़ी, सिगार, हुक्का, तम्बाकू चबाने, चिलम, सूंघने के रूप में किया जाता है । इनमें से सिगरेट और बीड़ी सबसे आम और सबसे ज्यादा हानिकारक हैं। भारत में 21 प्रतिशत लोग धूम्रपान रहित तंबाकू का उपयोग करते हैं। यह भी सामने आया है कि अधिकतर लोग  अपने रोल मॉडल, या सांस्कृतिक प्रथाओं, या कई बार माता-पिता के प्रभाव को देखने के बाद तंबाकू का प्रयोग करना शुरू कर देते हैं।

तम्बाकू के धुएँ में 7,000 से अधिक रासायनिक यौगिक होते हैं। धुआं रहित तम्बाकू के उत्पादों में 3,000 से अधिक रसायन होते हैं। जिनमें से कम से कम 70 कार्सिनोजन पाए जाते हैं जो मानव शरीर में लगभग हर अंग को नुकसान पहुंचाते हैं। लंबे समय तक तंबाकू का प्रयोग करने के कारण  कैंसर होने के अवसर ज्यादा रहते हैं।

तंबाकू शरीर को तो क्षति पहुंचाती है साथ में आर्थिक और पर्यावरण को भी  क्षति पहुंचाती है। तंबाकू की खेती के लिए जंगलों को नष्ट किया जा रहा है। इसके जलने से पर्यावरण में कई विषैले तत्व पैदा हो जाते हैं। इसके अलावा इसके निर्माण, पैकेजिंग और परिवहन से भी पर्यावरण प्रदूषण होता है। इस प्रकार, सिगरेट मानव जाति के इतिहास में सबसे घातक पदार्थ है।

इसके उपयोग को समाप्त करने के लिए, भारत सरकार ने राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया है, ताकि तम्बाकू नियंत्रण कानूनों को लागू किया जा सके, और तम्बाकू के हानिकारक प्रभावों के बारे में अधिक से अधिक  जागरूकता लाई जा सके। तंबाकू नियंत्रण कानून , सभी सार्वजनिक  स्थानों और कार्यस्थलों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध लगाता है। यह ऑडियो, विज़ुअल और प्रिंट मीडिया के सभी रूपों में सभी तंबाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष विज्ञापन और प्रचार दोनों पर बैन लगाता है। इसने तंबाकू के प्रयोग पर एक बड़ा प्रभाव डाला है। ऐसी आशा है कि इन उपायों से भारत में तंबाकू के उपभोग और उपयोग में आमूलचूल परिवर्तन आएगा।