बुजुर्गों में पुरानी बीमारी को लौटा सकती है गुस्सा करने की आदत

एक नए शोध में यह चौंका देने वाली बात सामने आई है कि बुजुर्गों के लिए उदासी से कहीं ज्यादा खतरनाक गुस्सा होता है, गुस्से से शरीर में उत्तेजना बढ़ती है और उससे दिल की बीमारियों, गठिया रोग व  cancer की संभावना बढ़ जाती है।

Psychology and Aging पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक गुस्से से पुरानी बीमारी भी फिर से हो सकती है जबकि उदासी से ऐसा नहीं होता। शोधकर्ताओं की माने तो बढ़ी हुई उम्र के कारण बुजुर्ग वो काम नहीं पाते हैं जो वो एक समय पहले कर सकते थे,शारीरिक रूप से कम समर्थ होने या फिर किसी को खो देने का अहसास बुजुर्गों में अक्सर गुस्से का कारण बनता है। ये सिर्फ 80 या उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्गों में देखने को मिला,गुस्से से उनमें उत्तेजना तो बढ़ती ही है साथ ही पुरानी बीमारियों के फिर से लौटने की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं लेकिन 80 से कम उम्र के बुजुर्गों को इस बात का कोई खतरा नहीं होता है।

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि दुख से बुजुर्गों को एक फायदा भी होता है, दुखी होने पर वो असलियत मानने लगते हैं कि अब वो शारीरिक व मानसिक रूप से क्या करने में सक्षम हैं और क्या नहीं, जिससे वो खुद को किसी काम के लिए मजबूर कर नुकसान नहीं पहुंचाते।

गुस्सा एक बहुत ही ताकतवर भाव है और इस स्थिति में एक व्यक्ति अपने लक्ष्यों का पीछा करने में जी जान लगाने की अंदर से क्षमता हासिल कर लेता है लेकिन ये सिर्फ ऊर्जा के रूप में कारगर तो है लेकिन 80 से कम उम्र के बुजुर्गों के लिए। ऐसा गुस्सा अक्सर तब आता है जब हमने कुछ बेहद कीमती इंसान या फिर चीज खो दी हो या फिर जीवन में कोई काम करना हमारी पहुंच में ना हो।

शिक्षा और therapy के जरिए बुजुर्ग अपने गुस्से को नियंत्रित रखना सीख सकते हैं। एक शोधकर्ता बरलो के मुताबिक अगर हम ये जान सकें कि कौन सा नकारात्मक भाव हमारे लिए खतरनाक है और कौन सा कम खतरनाक है फिर हम उस नुकसान की स्थिति का भी अच्छी तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं।