संसद को संबोधित करते अमित शाह

अमित शाह बोले – दं’गे कराना हमारी फितरत नहीं, 76% दं’गे कांग्रेस शासन के दौरान हुए

New Delhi : Home Minister Amit Shah ने दिल्ली हिंसा पर गुरुवार शाम को राज्यसभा में बहस का जवाब दिया। उन्होंने उत्तरपूर्वी दिल्ली में हिंसा रोकने के लिए लगातार दूसरे दिन पुलिस की तारीफ की। शाह ने कहा कि देश में 76% दंगे कांग्रेस शासन केदौरान हुए। हमारी सरकार में सिर्फ गुजरात में दंगे हुए। दंगे कराना हमारी फितरत में नहीं है। क्या Donald Trump के आने के दिनहमारी सरकार स्टेट स्पॉन्सर्ड दंगों का मुहूर्त निकालती? हम दंगे कराने वालों को ढूंढढूंढ कर अंदर करने वाले हैं। शाह ने विपक्ष सेसीएए और एनपीआर को लेकर भ्रम फैलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश में किसी को एनपीआर की प्रक्रिया से डरने कीजरूरत नहीं है।

शाह ने कहाहिंसा की निष्पक्ष ढंग से वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच हो रही है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिसने 700 से अधिक एफआईआर दर्ज कीं। हिरास और गिरफ्तारी मिलाकर 2647 लोगों को पकड़ा गया है। आरोपियों की पहचानकरने के लिए निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं किया गया। जिस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया है उसमें भी इसका ध्यान रखा।हमने आधार डाटा का इस्तेमाल नहीं किया है, सिर्फ राशन कार्ड और वोटर पहचान पत्र के विवरण का उपयोग किया है। अब तक 1922 चेहरे और व्यक्तियों की पहचान कर ली गई हैं। इनमें से 336 लोग उत्तर प्रदेश से आए थे।

उन्होंने कहामैंने कल लोकसभा में कहा था कि दिल्ली के प्रभावित इलाके में 20 लाख लोग रहते हैं, जो दिल्ली की कुल आबादी कीकुल 4% है। किसी एक व्यक्ति की जान जाना भी हमारे लिए दुखद है। दिल्ली पुलिस ने दंगा भड़काने की साजिश को 4% आबादीतक सीमित रखने में कामयाबी हासिल की। 24 फरवरी को दोपहर पहली बार दंगे की सूचना मिली और अंतिम सूचना 25 तारीख कीरात मिली है। इसके बाद मिले, लेकिन इनके पोस्टमार्टम में मौ का समय 25 तारीख से पहले का है।

दंगों से पहले क्या हुआ। 15 दिसंबर से शाहीन बाग में प्रदर्शन शुरू हुआ। इसके लिए जगह निश्चित होती है। हमें कोई आपत्ति नहीं, लेकिन 14 दिसंबर को रामलीला मैदान की रैली में जो भाषण हुए, उनमें कहा गया कि अब निकलने का वक्त है, नहीं तो कायरकहलाएंगे। इसके बाद प्रदर्शन शुरू हुए। इसके बाद 23 फरवरी को उत्तरपूर्वी दिल्ली में 7-8 धरने शुरू हो गए। इसके बाद एक नेता नेकहा कि हम 15 करोड़ हैं। धीरेधीरे एंटी सीएए प्रदर्शन साम्प्रदायिक दंगों में बदल गया।

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