गुस्ताखी माफ : बुआ और बबुआ की दोस्ती तोड़ने के पीछे निरहुआ का हाथ

New Delhi: मयावती के हाल में दिए गए बयानों से यह लगभग साफ हो गया है कि सपा और बसपा की चुनावी दोस्ती में अब दरार पड़ गई है, पर क्या इस दोस्ती को तोड़ने के पीछे निरहुआ का हाथ है। इस बात का पता लगाने के लिए हमारे पास न तो CID के ACP प्रद्युमन हैं जिनके पास हर केस का सोल्युशन होता है और न ही दया जो दरवाजा तोड़ कर सच का पता लगा सकें। पर हमारे पास ट्विट करती वह चिड़िया है जो हर बात का रिकार्ड रखती है, जिसके चहचहाने मतलब ट्विट करने से कई लोगो के वारे न्यारे तो कइयों के दाव उल्टे पड़े, आप यह मत समझियेगा कि हम कपिल शर्मा की बात कर रहे हैं। हम बात कर रहें हैं निरहुआ हिंदुस्तानी की। ट्विट करती चिड़िया ने हमें बताया कि 23 मई को निरहुआ हिन्दुस्तानी ने ट्विट किया था कि ‘दूर दृष्टी ,कड़ी मेहनत , पक्का इरादा जब तक तोड़ेंगे नहीं,तब तक छोड़ेंगे नहीं”

उस समय तो शायद ही किसी को इस ट्विट का मतलब समझ में आया हो पर जैसे जैसे दिन बितते गए वैसे वैसे चुनावी दोस्ती कमजोर होती चल गई और अब यह टूटने के कगार पर आ पंहुची, तब पता चला कि निरहुआ किस दूर दृष्टी, पक्का इरादा की बात कर रहे थे। कहीं उनकी जब तक तोड़ेंगे नही, तब तक छोड़ेंगे नहीं वाली नीति का तो असर नहीं है जो बबुआ ने बुआ से मुंह फेर लिया और यह एक बार फोन भी नहीं किया।
जियो के जमाने में बबुआ का बुआ को फोन नहीं करना खलता है, जियो आने के बाद जब पूरा देश फोन पर ही लगा हुआ है तब बबुआ ने बुआ को क्यों नहीं फोन किया। शायद उनके पास जियो का सिम न रहा हो क्योंकि जियो का सिम तो उनके विपक्षी पार्टी के शासन में लॉच हुआ था। इसलिए विरोध करने के लिए उन्होंने जियो की सिम न लिया हो और अब उसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा हो। पर बबुआ से अलग एक व्यक्ति है जो मोबाइल पर खुब लगे हुए हैं और संसद में भी मोबाइल चलाते दिख जा रहे हैं। उनके पार्टी के लोगों को सफाई देना पड़ रहा है कि वह मोबाइल में हिन्दी के कठिन शब्दों का अर्थ समझ रहे थे। अब इस पर तो हमें पाकिस्तानी आंटी की बात ही याद आती है कि सब मिल कर हमें पागल बना रहे है…..

नोट : इस कंटेंट का उद्देश्य ह्यूमर है। किसी व्यक्ति विशेष का मज़ाक़ उड़ाना नहीं।