शादी बाद संभाली गृहस्थी…फिर पति बोले- तुम पढ़ोगी और पुष्पलता बच्चे को सीने से लगाये बनीं IAS

New Delhi : आपने वो कहावत तो सुनी होगी कि हर कामयाब आदमी के पीछे एक औरत का हाथ होता है, लेकिन जो कहानी आज हम आपको बताने जा रहे हैं वो इस कहावत से उलट है। ये कहानी है आईएएस अफसर पुष्पलता की। उनकी ये कहानी आम कहानियों से इसलिए अलग है क्योंकि उन्होंने कई कहावतों और मान्यताओं को अपनी मेहनत और मजबूत संकल्प के दम पर गलत साबित किया है। अक्सर लड़कियों के बारे में कहा जाता है कि शादी हुई तो सपने, करियर, पढ़ाई-लिखाई सब खत्म और दुर्भाग्य से अक्सर भारतीय समाज में होता भी यही है।

पुष्पलता के साथ भी यही हुआ परिवार वालों ने अच्छा लड़का देख बिटिया की शादी कर दी। जिसके बाद उनका जीवन घर-गृहस्थी संभालने में ही बीतता रहा। कई सालों तक पढ़ाई से नाता टूटा रहा फिर पति ने उन्हें अपने सपनों को जीना सिखाया। अपने पति और ससुराल वालों के सहयोग से पुष्पलता जो उस वक्त 2 साल के बच्चे की मां भी थी, 2017 में यूपीएससी की परीक्षा अच्छी रैंक के साथ पास करती हैं और सभी कहावतों और मान्यताओं को बदल देती हैं।
हरियाणा के रेवाणी की रहने वालीं पुष्पलता 2017 में जब 80वीं रेंक लाकर आईएएस बनी तो मीडिया में टॉपर्स से ज्यादा उन्ही के चर्चे थे। कारण यही था कि उनकी कहानी अलग थी। उन्होंने उन बेटियों में आस जगाई थी जो शादी के बाद खुद को घर-गृहस्थि के बीच अपने सपनों को सिर्फ कल्पना समझने लगती हैं। उन्होंने उस समाज को जवाब दिया जो ये कहता है कि शादी के बाद बेटियों को सिर्फ घर-गृहस्थि में ही ध्यान देना चाहिए। पुष्पलता शुरूआत से ही पढ़ाई-लिखाई में अव्वल रहती थीं।

10वीं और 12वीं उन्होंने अच्छे अंको के साथ पास की। इसके बाद उन्होंने बीएससी और मास्टर करने के बाद एमबीए भी किया। पढ़ाई लिखाई में घरवालों ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। घरवालों ने उन्हें पूरा समय दिया।
पढ़ाई पूरी करने के बाद पुष्पलता को एक प्राइवेट कंपनी में अच्छी खासी सेलरी के साथ जॉब मिल गई। इसी दौरान घरवाले उनकी शादी के बारें में सोचने लगे और एक डॉक्टर लड़के से शादी तय कर दी गई। मां-बाप के फैसले के आगे पुष्पलता ने हां कर दी। शादी होकर जब वो ससुराल में आईं तो वो अपने सपनों और अपनी पढ़ाई से दूर होती चली गईं। ये लगभग पांच साल का समय था। अब उनके पास अपने दो साल के बेटे की जिम्मेदारी भी थी। इसी दौरान उन्होंने अपने पुराने सपने सिविल सेवा में जाने का विचार बनाया। घर और 2 साल के बेटे की जिम्मेदारी के साथ वो ये इतनी कठिन परीक्षा कैसे पास कर पाएंगी, वो यही सोचती रहतीं। लेकिन उनके पति और उनके ससुराल वालों ने इसमें उनका पूरा साथ दिया। उन्होंने कई बार दिल्ली जाकर तैयारी करने का भी मन बनाया पर वो अपने बेटे के बारे में सोच के नहीं जाती थीं।

उन्होंने घर पर ही रहते हुए कुछ अच्छे मार्गदर्शन में इस कठिन परीक्षा की तैयारी करनी शुरू कर दी। वो 5 घंटे सेल्फ स्टडी कर इस परीक्षा की तैयारी करतीं। जब उन्होंने पहली बार ये परीक्षा दी तो वो सिर्फ 7 नंबरों से चूक गईं। लेकिन पति और ससुराल वालों ने फिर से हौसला बढ़ाया तो उन्होंने 2017 में दोबारा परीक्षा दी और इस बार उन्होंने इसे ऑलओवर 80 रेंक के साथ क्रेक किया। वो अपनी सफलता के लिए अपने पति और ससुराल वालों का शुक्रिया अदा करती हैं।

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