हाथरस के पीड़ितों को डराने लगे ठाकुर, महापंचायत से डर का माहौल, रावण-अखिलेश जायेंगे मिलने

New Delhi : हाथरस प्रकरण उत्तर प्रदेश सरकार के लिये गले की हड‍्डी बनती जा रही है। सरकार इस प्रकरण को जरूर दबाने या ठंडा करने की कोशिश कर रही है लेकिन सामाजिक भेदभाव के तानेबाने और प्रशासनिक शिथिलता की वजह से मामला एक अलग ही रुख अख्तियार करता जा रहा है। अब इलाके के ठाकुरों ने अपना रुख कड़ा कर लिया है। इस मसले को लेकर आसपास के ठाकुरों ने महापंचायत बुलाई है। ठाकुर अब आरोपियों के समर्थन में मुहिम चलाने की योजना बना रहे हैं। यही नहीं इलाके में ये बात ठाकुरों के बीच आग की तरह फैला दी गई है कि पूरा मामला ऑनर का है और दलितों ने ठाकुरों को जानबूझकर फंसा दिया है।

दूसरी तरफ पीड़ितों की आवाज बनकर सामने आनेवाले भीम सेना के चीफ चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण आज पीड़ितों से मिलने के लिये पहुंचनेवाले हैं। ऐसी आशंका है कि रावण के वहां पहुंचने से इलाके के दलितों को भी गोलबंद करने में मदद मिलेगी। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी अपने सहयोगियों के साथ पीड़ितों से मिलने पहुंचेंगे। इलाके में चौतरफा मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। ऐसा लग रहा है जैसे किसी बड़े तूफान से पहले की शांति हो। कोई एक दूसरे से बात करने तक को तैयार नहीं।
इलाके का ठाकुर समाज खुलकर चुनौती दे रहा है। दलित परिजनों के लिये आक्रोश में उबल रहा है। उनको लग रहा है मीडिया, अफसर और राजनेताओं ने अपना-अपना हित साधते हुये ठाकुरों को नीचा दिखाया है जबकि मामला कुछ अलग ही था। इसलिये इन मसलों पर आम राय कायम करने के लिये महापंचायत बुलाई गई है। दो दिन पहले ही जब पुलिस की निगरानी में पीड़ित परिवार नजरबंद था तो ठाकुरों की गांव में इस पर पंचायत हुई थी और गांव की पंचायत ने यह मान लिया है कि मामला ऑनर का है और ठाकुर समुदाय पर कीचड़ उछाला जा रहा है।

इधर राज्य सरकार के मामले की जांच सीबीआई से कराने के फैसले को लेकर भी पीड़ित परिवार सहमे हुये हैं। उन्हें नार्को टेस्ट का भी सरकार का फैसला गले के नीचे नहीं उतर रहा है। शनिवार को जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पीड़ित परिजनों से मिलने गये थे तो यह मामला उठा था। इतना ही नहीं पीड़ित परिजनों का कहना है कि पूरे देश में यह इकलौता केस होगा जहां पीड़ित परिजनों का ही नार्को टेस्ट किया जायेगा। आखिर ऐसा क्यों किया जा रहा है? मामले में एसआईटी की जांच चल रही थी और हमने सीबीआई की जांच कराने की मांग भ नहीं की तब भी सीबीआई जांच की अनुशंसा कर दी गई। यह सब क्यों किया जा रहा है? पिछले कई दिनों से अस्त व्यस्त चल रहे पीड़ित परिजनों के इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।

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