इस्तीफे के सवाल पर अलका लांबा का सीधा जवाब, कहा- मैं कोई इस्तीफा नहीं दे रही हूं

NEW DELHI: आम आदमी पार्टी की विधायक अलका लांबा के एक ट्वीट से राजनीति में उथल-पुथल जारी हैं। दरअसल, अलका ने अपने ट्वीट में कहा था कि विधानसभा में चर्चा के दौरान उनसे राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लिए जाने को लेकर अपने भाषण में मांग शामिल करने को कहा गया था, जो मुझे मंजूर नही था। मैंने सदन से वॉक आउट किया। अब इसकी जो सजा मिलेगी, मैं उसके लिए तैयार हूं।

सूत्रों के हवाले से खबर भी सामने आई कि आप पार्टी ने उनकी प्राथमिक सदस्यता रद्द कर दी हैं और उनसे इस्तीफा भी ले लिया हैं। चांदनी चौक से विधायक अलका लांबा ने कहा इस खबर का खंडन करते हुए कहा कि मैं इस्तीफा नहीं दे रही हूं। आपको बता दें कि इससे पहले अलका लांबा ने मीडिया को बताया था कि मेरे वॉक आउट के बाद मुख्यमंत्री ने मुझे मैसेज किया कि मैं अपना इस्तीफा दे दूं.. विधायकी छोड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा था कि मैंने पार्टी की टिकट पर चुनाव जीता हैं, पार्टी चाहती हैं तो मैं इस्तीफा देने के को तैयार हूं।

वहीं इस मामले को लेकर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि उनसे इस्तीफा नहीं मांगा गया था। हम इसमें विश्वास नहीं करते कि राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लिया जाना चाहिए। किसी तरह का कोई इस्तीफा नहीं हुआ है और न ही हमने इस्तीफा देने का कोई दवाब बनाया है। वहीं विधायक जरनैल सिंह ने कहा कि राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लिए जाने संबंधी प्रस्ताव वास्तविक प्रस्ताव में शामिल नहीं था, जो मैंने कहा वह सिर्फ मेरा मानना था, तकनीकी रूप से इसे नोटिस में नहीं लिया गया था।

Aam Aadmi Party

इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता अजय माकन ने आप पार्टी पर हमला बोला। अजय माकन ने कहा कि राजीव गांधी ने देश के लिए अपना जीवन बलिदान किया है, यहां तक की बीजेपी ने कभी भी उनसे भारत रत्न वापस किए जाने की मांग नहीं उठाई। केजरीवाल को इस मामले पर माफी मांगनी चाहिए, साथ ही सदन में कार्यवाही के दौरान इस प्रस्ताव को रद्द किया जाए।

वहीं इस्तीफे के खबर के चलते अलका लांबा के समर्थकों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक पत्र लिखा था। इस पत्र के जरिए समर्थकों ने विधायक अलका का इस्तीफा स्वीकार न करने की मांग की। इस पत्र पर चांदनी चौक सीटे विधायक अलका लांबा के समर्थकों के हस्ताक्षर भी हैं। चिट्ठी में लिखा गया है कि क्या विधायक को इतना भी हक नहीं है कि वो अपने विचार रख सकें।

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