‘एक राष्ट्र एक टैक्स’ का सिस्टम सही नहीं साबित हो सकता : अरुण जेटली

New Delhi: जीएसटी की दूसरी सालगिरह के मौके पर पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसे सफल करार दिया है। पूर्व वित्त मंत्री ने जीएसटी के इस सिस्टम को बेहद सफल टैक्स सिस्टम बताया है। जीएसटी को लेकर देश में जितने भी सवाल खड़े हो रहे थे, उस पर इन्होंने कहा कि सब आधारहीन साबित हुई हैं।

इसके लागू होने से करदाताओं की संख्या में इजाफा हुआ है। जो कि देश की वित्त व्यवस्था के लिए एक अच्छा संकेत है। आज एक करोड़ बीस लाख लोग जीएसटी के तहत टैक्स दे रहे हैं। जबकि पहले यह संख्या केवल 65 लाख थी। इसमें आ रहे सुधार से अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिली है। केंद्र के साथ-साथ राज्यों की आय में भी बढ़ोतरी हुई है। जनता से संबंधित योजनाओं को लागू करने के लिए वित्तीय ताकत में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

उन्होंने कहा है कि भारत जैसे देश के लिए ‘एक राष्ट्र एक टैक्स’ का सिस्टम सही नहीं साबित हो सकता है। देश में आधा से ज्यादा आबादी गरीबी रेखा के नीचे अपना जीवन यापन कर रही है। ऐसी स्थिति में ‘एक राष्ट्र एक टैक्स’ उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकती है।

देश में आय के संदर्भ में काफी विभिन्नताएं हैं, ऐसे में एक टैक्स का निर्धारण करना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता है।लोगों के आय के इस भारी अंतर की खाई को कम नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हवाई चप्पल और मर्सिडीज कार पर एक सामान टैक्स नहीं लगाया जा सकता।

उन्होंने कहा कि जीएसटी के कारण आज राज्यों के प्रवेश सीमा पर ट्रकों को अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़ता है। जीएसटी की नई स्लैब के बारे में उन्होंने कहा कि अब ज्यादातर वस्तुओं को 12 फीसदी और 18 फीसदी के स्लैब के दायरे में लाया जा चुका है। आने वाले समय में इन दोनों को मिलाकर एक नई स्लैब बनाई जा सकती है।