जिस देश में आज भी ज्यादा बच्चे पैदा करना शान का पर्याय माना जाता है,वहां कैसे संभव होगा जनसंख्या निंयत्रण

चांद और मंगल पर पहुंच चुके हम परिवार नियोजन का टीवी पर विज्ञापन देख परेशान हो जाते हैं और चैनल बदलने के लिए रिमोट ढूंढ़ने लगते हैं।

New Delhi : आज विश्व जनसंख्या दिवस है। इस मौके पर आज हम बात करेंगे अपने देश भारत की। भारत! विश्व का दूसरा सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश। हम कितने दिनों से यही एक वाक्य सुन रहे हैं लेकिन अगर हमने इस वाक्य को गंभीरता से नहीं लिया इस पर मंथन नहीं किया तो ये वाक्य बदल सकता है। फिर हम सुनेंगे भारत सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश। आंकड़ों को देखें तो ये वाक्य हो सकता है कुछ सालों में ही बदल जाए । आने वाले सिर्फ 5 सालों में ही हम चीन को पछाड़ कर पहले नंबर का खिताब अपने नाम कर लेंगे। और ये हो भी क्यों न जिस देश में आज भी ज्यादा बच्चे पैदा करना शान और मर्दाना का पर्याय माना जाता है। कई परिवारों में आज भी आज भी ये मानसिकता है कि परिवार कुनबा बराबर होना चाहिए। आज भी लोग लड़के की चाह में परिवार बड़ा कर लेते हैं। ये कितनी चुभने वाली बात है ।

ऐसे समय में जब सभी समस्याओं की जड़ जनसंख्या बन गई है, हम अब भी इसका हल खोजने की बजाए इसे हंसी मजाक का विषय समझते हैं। गांव से लेकर शहरों में आज भी जब परिवार नियोजन की बात की जाती है तो इसे शर्म या हंसी मजाक का विषय माना जाता है। चांद और मंगल पर पहुंच चुके हम परिवार नियोजन का टीवी पर विज्ञापन देख परेशान हो जाते हैं और चैनल बदलने के लिए रिमोट ढूंढ़ने लगते हैं। हम कैसे इतनी बड़ी समस्या से मुंह फेर सकते हैं। खबरे आती हैं अस्पताल में बेड नहीं हैं एक बेड पर चार चार लोगों का इला ज होता है हजारों मरीजों को बीच सिर्फ एक डाक्टर होता है। स्कूलों की हालत खराब है एक क्लासरूम में 100 से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं । हर महीने शहरों की तरफ एक भीड़ खिंची चली आती है। और जीवन की तलाश में ये भीड़ दड़बों में जिंदगी गुजारती है। जरा सोचिए किसी भी सरकार के लिए कहां तक संभव हो पाएगा कि इस बेतहाशा भीड़ के रहने-खाने से लेकर स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराए। जनसंख्या बढ़ती जा रही है लेकिन हमारे पास संसाधन तो सीमित ही हैं। खेत पेड़ पहाड़ नदियां तेल सब सीमित ही तो हैं।

चीन जहां इस समस्या को गंभीर और खतरनाक मानते हुए इस पर कड़ा कानून बनाता है वहीं हम भारतीय इस गंभीर समस्या को आज भी मजाक ही मानते हैं। आज भी भारत गरीबी बेरोजगारी भुखमरी अशिक्षा जैसी खामियो को दूर नहीं कर पाया है और इसके पीछे देश की जनसंख्या का बड़ा हाथ है। लेकिन इसका समाधान क्या है। कई लोग कहते हैं भारत को भी चीन की तरह ही जनसंख्या नियंत्रण पर कड़ा कानून बनाना चाहिए। लेकिन जरा सोचिए जिस देश में मां बेटे की शादी होते ही बच्चों का मुंह देखना चाहती हो पति पत्नि शादी के कुछ ही सालों के बाद एक बड़े परिवार का हिस्सा बन जाते हों ऐसे में ये कानून पूरे देश को ही जेल में डाल देगा। इसका एक दूसरा और बेहतरीन उपाय है लोगों में जागरूकता लाना जो कि लोगों को शिक्षित कर लाई जा सकती है। लेकिन भारतीय राजनीति इसमें धर्म घुसा देती है। कोई कहता है कि इसका जिम्मेदार एक खास धर्म है तो कोई नेता रेलियों में खुले आम दस बच्चे पैदा करने की सलाह देता है। हम इन सभी वाहियात बातों से ही नहीं उबर पाए हैं। लेकिन अब वक्त आ गया है हमें इस पर मंथन करने का।

आबादी के लिहाज से उत्तर प्रदेशा भारत का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला राज्य है। यहां देश के करीब 20 करोड़ लोग रहते हैं। सिक्किम सबसे छोटा राज्य है, जहां की आबादी 5 लाख के करीब है। यूपी के बाद देश के दो बड़े राज्य महाराष्ट्र और बिहार हैं। महाराष्ट्र की आबादी 11 करोड़ और बिहार की आबादी करीब 10 करोड़ है। दक्षिण भारतीय राज्य केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण तेजी से हो रहा है, जबकि बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान में स्थिति बेहद खराब है। अगर ऐसा ही रहा तो हम 2024 तक चीन को पछाड़ देंगे।

  • लोगों को बड़े स्तर पर परिवार नियोजन की जानकारी दी जाए। इसके अलावा लोगों में शिक्षा के अभाव को खत्म करने के लिए अलग अलग योजनाओं की शुरुआत की जाए।
  • बढ़ती जनसंख्या को रोकने के लिए सरकार के अलावा परिवार और समाज को भी अहम भूमिका निभानी चाहिए यानि रूढ़िवादी सोच में बदलाव करना चाहिए।

आपको बता दें पहली बार विश्व जनसंख्या दिवस (World Population Day) 11 जुलाई 1989 को मनाया गया था। बढ़ती जनसंख्या को रोकने और लोगों को जनसंख्या वृद्धि के नुकसान के बारे में जागरुक करने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र के द्वारा ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ मनाने की शुरुआत की गई थी।