73वें स्वतंत्रता दिवस पर 44 साल की हुई फिल्म ‘शोले’..किरदार और डायलॉग्स आज भी हैं चर्चा में

New Delhi: साल 1975 में 15 अगस्‍त यानि  स्‍वतंत्रता दिवस के दिन अमिताभ बच्‍चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, जया बच्‍चन, संजीव कुमार जैसे दिग्‍गज सितारों से सजी फिल्‍म ‘शोले’ रिलीज हुई थी। 73 वें स्वतंत्रता दिवस पर फिल्म को 44 साल पूरे हो जाएंगे। बच्चे हों या बुजुर्ग शायद ही कोई ऐसा होगा, जिसने इस फिल्‍म को न देखा हो। वर्षों बीत जाने के बाद भी फिल्म के डायलॉग्स और किरदार आज भी चर्चा में हैं।

इस फिल्‍म का निर्माण और निर्देशन रमेश सिप्‍पी ने किया था। सिप्पी अभी भी इसी फिल्‍म के लिए जाने पहचाने जाते हैं। जैसा कि बॉलीवुड में आज भी स्‍पेशल तारीख पर फिल्‍में रिलीज करने का चलन है। ऐसा ही कुछ  44 साल पहले भी हुआ था और बात जब स्‍वतंत्रता दिवस जैसे विशेष दिन की हो तो हर कोई इस दिन अपनी फिल्‍म रिलीज करना चाहता है। आइये आपको 44 साल पहले बने फिल्म शोले के बारे में बताते हैं कुछ रोचक बातें-

शोले ने उस वक्त तोड़ा था कमाई का रिकॉर्ड
आज हम कबीर सिंह और सुपर 30 जैसी फिल्मों की कमाई पर बहस करते हैं।लेकिन सही मायनों में फिल्म की कमाई को अगर मापा जाएगा तो शोले इसमें कहीं आगे होगी। हालांकि शोले रिलीज के वक्त उतनी नहीं चली थी लेकिन दो हफ्ते बाद फिल्म ने धाकड़ कमाई की। फिल्म ने सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले। 1975 में इसने 15 करोड़ की कमाई की थी।

गब्बर सिंह का जलवा जो आज तक है कायम
कितने आदमी थे ? वाला सवाल, हाथ में लटकती बेल्ट और वो भयानक हंसी जिससे पूरी चंबल घाटी कांपने लगती। समझ तो गए ही होंगे आप। हम बात कर रहे हैं शोले के गब्बर सिंह की यानि अमजद खान की। इस एक डायलॉग ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। “यहां से पचास-पचास कोस दूर जब बच्चा रात में रोता है तो मां कहती है, बेटा सो जा, सो जा नहीं तो गब्बर सिंह आ जाएगा और ये तीन हरामजादे गब्बर सिंह का नाम पूरा मिट्टी में मिलाय दिए” , “गोली से मरने में कहीं तकलीफ़ होती है क्या?” और ‘दुनिया की किसी जेल की दीवार इतनी पक्की नहीं कि गब्बर को बीस साल रोक सके’। ये डायलॉग्स कभी पुराने नहीं सकते।

शोले के माध्यम से बॉलीवुड में पहली बार कोई डाकू विज्ञापनों में आया
अमजद खान का डाकू गब्बर का किरदार इतना फेमस हो गया था कि वे ब्रिटेनिया ग्लूकोज बिस्किट के विज्ञापन में बतौर गब्बर सिंह ही नजर आए थे। तब हिंदी सिनेमा का कोई विलेन पहली बार विज्ञापनों में दिखाई दिया था। इस विज्ञापन की पंचलाइन थी, गब्बर की असली पसंद।

सिर्फ गब्बर ही नहीं बल्कि सांबा भी रहा हिट
फिल्‍म में सांबा का किरदार निभाने वाले एक्‍टर मैक मोहन का इस पूरी फिल्‍म में बस एक ही डायलॉग था। वह डायलॉग था ‘पूरे पचास हजार’। लेकिन कई फिल्‍मों में नजर आने के बाद आज भी उन्‍हें सांबा के नाम से ही जाना जाता है। उन्होंने बॉलीवुड में कई फिल्में कीं लेकिन उन्हें पहचान सांबा के रूप में ही अधिक मिली।

जय-वीरू की दोस्ती बनी मिसाल
शोले फिल्म के गाने ‘ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे’ में अपनी दोस्ती का जलवा दिखाने वाले जय और वीरू की जोड़ी और दोस्ती की मिसाल आज तक दी जाती है। किसी भी दोस्ती में ईमानदारी और प्यार का होना सबसे ज्यादा जरूरी होता है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण है ‘शोले’ के जय और वीरू। फिल्म में अमिताभ और धर्मेंद्र की जोड़ी ने दोस्ती की ऐसी मिसाल दी है जिसे आज भी लोग याद करते हैं।

बॉलीवुड की पहली फिल्म जिसमें महिला ने चलाया तांगा
बॉलीवुड की ड्रीमगर्ल हेमा मालिनी ने फिल्म ‘शोले’ में बंसती का किरदार निभाया था। वह उस वक्त पहली ऐसी महिला थीं,जिन्होंने बॉलीवुड फिल्म में तांगा चलाया। साथ ही वह एक निडर गांव की लड़की के रूप में नजर आईं। हेमा ने एक साक्षात्कार के दौरान बताया कि, लोग आज भी उन्हें बसंती बुलाते हैं।

शोले के बाद 17 साल बाद जया ने की अगली फिल्म
यूं तो इस फिल्‍म में जया बच्‍चन ने एक विधवा का किरदार निभाया था। लेकिन वह फिल्‍म की शूटिंग के दौरान प्रेग्‍नेंट भी थीं, जिसके बाद उन्होंने अपने बेटे अभिषेक को जन्म दिया। परिवार, पति और बच्चों का ख्याल रखते-रखते वह फिल्मों से 17 साल दूर हो चुकी थी। इसके बाद जया ने 1998 में रिलीज हुई फिल्म ‘हजार चौरासी की मां’ से 17 साल बाद दोबारा फिल्म में कदम रखा।