इस साल जून तक जम्मू-कश्मीर में हिं’सा में हो चुकी हैं 271 मौ’तें

New Delhi: अगर जम्मू-कश्मीर में 2008 ह’त्याओं और हिं’सा के मामले में सबसे घा’तक साल था, तो ये साल भी कुछ अच्छा नहीं रहा है। 2008 में कुल मिलाकर 586 सुरक्षा कर्मियों और नागरिकों ने अपनी जा’न गंवाई थी।  2019 की पहली छमाही भी इस मा’मले में कुछ कम नहीं रही। जनवरी से अब तक 271 मौ’तें दर्ज की गई हैं। इन आकंडो की जानकारी जम्मू और कश्मीर सिविल सोसायटी (JKCCS) के द्वारा जारी की गई  रिपोर्ट से मिली है।

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संगठन ने कहा कि 2019 के पहले छह महीनों में 43 नागरिक, 120 आतं’कवादी और 108 भारतीय सशस्त्र बल के जवान मा’रे गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ह’त्याओं की संख्या फरवरी में सबसे अधिक 87 थी। जबकि सबसे कम अप्रैल में 19 थी।

जेकेसीसीएस ने बताया कि मा’रे गए 43 नागरिकों में से 14 सुरक्षा बलों के हाथों मा’रे गए इसके अलावा 12 अज्ञात आ’तंकवादियों द्वारा मा’रे गए। आठ नियंत्रण रेखा के पार गो’लाबारी में मा’रे गए और पांच संदिग्ध आ’तंकवादियों द्वारा मा’रे गए।

इनमें से अधिकांश नागरिक ह’त्याएं चार दक्षिण कश्मीर जिलों से हुई हैं। अनंतनाग में 3, कुलगाम (2), शोपियां (5) और पुलवामा (11)  लोगों की मौ’त घट’नाओ में हुई हैं। उत्तर पूर्वी जिलों में मा’रे गए नागरिकों की संख्या नौ  है, जिसमें से  बांदीपोरा में 2 और बारामूला में 3 लोग मा’रे गए।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आ’त्मघा’ती हम’ले में 48 सुरक्षाकर्मी श’हीद हो गए। इसके अलावा, 15 सुरक्षाकर्मियों ने कथित तौर पर आ’त्मह’त्या की, जबकि जम्मू-कश्मीर पुलिस के दो विशेष पुलिस अधिकारी संदिग्ध उ’ग्रवादियों द्वारा मा’रे गए।

फरवरी के आ’त्मघा’ती हमले के बाद, रिपोर्ट में कहा गया कि राज्य में सुरक्षा बलों द्वारा घेरा और तलाशी अभियान चलाया गया। 2019 के पहले छह महीनों में कम से कम 177 CASO ऑपरेशन भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा चलाए गए। कुलगाम, अनंतनाग, पुलवामा और शोपियां के चार दक्षिण कश्मीर जिलों में अधिकांश CASO देखे गए। 177 CASO में कम से कम 118 आ’तंकवा’दियों को मा’र गिराया गया। इसके साथ-साथ चार नागरिक भी मु’ठभेड़ में मा’रे गए।