22 जून से अनशन पर बैठे जीडी अग्रवाल का निधन, गंगा तो नहीं हुई साफ़ वह दनिया छोड़ गए

New Delhi: 22 जून से अनशन पर बैठे पर्यावरणविद जीडी अग्रवाल का आज देर शाम निधन हो गया है. इस घटना के आबाद अब मोदी सरकार की और अधिक आलोचना शुरू हो गई है. वहीं अब गंगा तो साफ़ नहीं हुई लेकिन वह अनशन करते-करते दुनिया छोड़ गए. बताया जा रहा है कि, वह गंगा सफाई अभियान के लिए अनशन पर बैठे थे लेकिन कुछ भी हासिल नहीं हुआ.

गौरतलब है कि, करीब 4 साल पहले जब मोदी सरकार केंद्र में आई थी तो उन्होंने गंगा सफाई को लेकर नमामि गंगे प्रोजेक्ट शुरू किया था जिसके लिए देश भर के कई राज्यों में हजारों करोड़ का बजट पास हुआ। लेकिन इस योजना का लाभ होता नहीं दिखाई दिया है। वहीं गंगा सफाई को लेकर अनशन पर बैठे पर्यावरणविद जीडी अग्रवाल के निधान के बाद इस मामले ने ओर हंगामा खड़ा कर दिया है। बता दें कि गंगा में अवैध खनन, बांधों जैसे बड़े निर्माण और उसकी अविरलता को बनाए रखने के मुद्दे पर पर्यावरणविद स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद यानी प्रो. जीडी अग्रवाल अनशन पर थे. स्वामी सानंद गंगा से जुड़े तमाम मुद्दों पर सरकार को पहले भी कई बार आगाह कर चुके थे और इसी साल फरवरी में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिख गंगा के लिए अलग से क़ानून बनाने की मांग की थी. कोई जवाब ना मिलने पर 86 साल के स्वामी सानंद 22 जून को अनशन पर बैठ गए थे. इस बीच दो केंद्रीय मंत्री उमा भारती और नितिन गडकरी उनसे अपना अनशन तोड़ने की अपील की थी, लेकिन वो नहीं माने. लेकिन अब इस घटना के बाद मामला और भी गर्माता नजर आ रहा है.

वहीं पीएम मोदी ने भी जीडी अग्रवाल के निधन पर शोक जताते हुए अपना दुह प्रकट किया है. वह कहते हैं कि, उनके जाने से बेहद दुखी हूँ. आपको बता दें कि स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ जीडी अग्रवाल पहले भी गंगा की सफाई के मुद्दे पर आमरण अनशन पर बैठ चुके हैं. वर्ष 2012 में वह आमरण अनशन पर बैठे थे. बाद में सरकार की ओर से अपनी मांगों पर सहमति मिलने के बाद अनशन समाप्त कर दिया. इस अनशन के दौरान उनकी हालत बिगड़ गई थी और इसके उन्हें उत्तर प्रदेश के वाराणसी से दिल्ली लाया गया था.

The post 22 जून से अनशन पर बैठे जीडी अग्रवाल का निधन, गंगा तो नहीं हुई साफ़ वह दनिया छोड़ गए appeared first on Live States.