चीन की सेना जब पीछे नहीं हटी तो सिर्फ बात करने गये कर्नल संतोष बाबू, तभी उन पर चीनी टूट पड़े

New Delhi : गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ झड़प में शहीद हुये कर्नल बी. संतोष बाबू सोमवार को चीनी पक्ष से हुई बातचीत का नेतृत्व कर रहे थे। और सोमवार को ही देर रात वह शहीद हो गये। मूलत: तेलंगाना के सूर्यपत जिले के निवासी कर्नल संतोष बाबू 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग अफसर भी थे। इससे पूर्व भी वह तनाव कम करने को लेकर हुई कई बैठकों का नेतृत्व कर चुके थे। सेना से जुड़े सूत्रों ने कहा कि सोमवार की रात जब चीनी सेना तय कार्यक्रम के अनुसार पीछे नहीं हटी तो कर्नल बाबू स्वयं उनसे बात करने गए थे। इसी दौरान चीनी पक्ष की तरफ से उनके साथ हाथापाई की गई, जिसके बाद भारतीय सैनिकों ने भी जवाब दिया।

इससे दोनों तरफ से झड़प शुरू हो गई। पत्थर और लाठी-डंडे चले। दोनों पक्षों में कई लोग घायल हो गये। कई लोग लापता भी हुये, हालांकि बाद में वे लौट आये। सेना की तरफ से आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन मंगलवार देर रात तक कुछ सैनिक लापता थे, जिनकी तलाश की जा रही थी।
कर्नल संतोष बाबू के परिवार में उनके माता-पिता, पत्नी के अलावा एक बेटी और बेटा है। इस झड़प में 16 बिहार रेजिमेंट के दो सैनिक भी घायल हुये हैं, जिनमें एक हवलदार के पलानी तथा हवलदार सुनील कुमार भी शामिल हैं। इस झड़प में 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने की खबर है। साथ ही साथ 43 के करीब चीनी सैनिक भी या तो मारे गए हैं, या फिर घायल हैं। उन्हें ले जाने के लिए एलएसी पर चीनी चॉपर भी देखे गये।

बिहार का एक लाल शहीद हो गया। शहीद जवान सुनील कुमार (38) छपरा जिले के दीघरा परसा गांव का रहने वाला था। शाम साढ़े पांच बजे पत्नी मेनका राय को विभागीय अधिकारियों ने फोन कर घटना की जानकारी दी। पति की शहादत की खबर सुन पत्नी फूट-फूटकर रोने लगी। पूरा गांव घर पर इकट्ठा हो गया। जवान की शहादत पर पूरे गांव में मातम पसरा है।

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