जो लौट के घर न आयें : मां-पिता से भाई की शहादत छिपाई, मां बोली-बेटे को सलाम, शहादत पर गर्व

New Delhi : हंदवाड़ा के शहीदों के यहां मातम अब भी पसरा है। कई घरों में तो हालात ऐसे हैं कि सुनकर सीना चाक हो जाये। अब शहीद नायक राजेश कुमार का ही लीजिये। पांच भाई बहनों में एक राजेश ही थे जो कमा रहे थे। उनके परिवार के पास जमीन भी नहीं जिस पर खेती हो। अब भाई बहनों में इतनी ताकत नहीं बची कि अपने मां पिता को भाई के जाने की खबर दे सकें। 36 घंटे तक अपने मां पिता को उन्होंने ये जानकारी नहीं दी।

शहीद राजेश की यात्रा में पूरा इलाका उमड़ पड़ा।

शहीद नायक राजेश कुमार पंजाब के मनसा जिले के रहने वाले हैं। उनका परिवार सर्दुलगढ़ तहसील के राजराना गांव में रहता है। शहीद की पार्थिव देह सोमवार को गांव पहुंची। 29 साल के राजेश के पांच भाई-बहन। माता पिता राजराना गांव में ही रहते हैं। राजेश के भाई सुभाष के मुताबिक – जब तक राजेश का पार्थिव देह नहीं पहुंचा वे अपने माता-पिता को भाई की शहादत की खबर नहीं दे पाये। उनको कैसे बतायें, समझ ही नहीं सके। राजेश 10 साल पहले सेना में भर्ती हुए थे और आखिरी बार फरवरी में घर आये थे। उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। भाई बटाई पर खेत लेते थे। खुद उनके पास एक एकड़ से भी कम जमीन है। परिवार का गुजारा राजेश जो पैसे भेजता था, उससे हो रहा था। उनकी दोनों बहनों की शादी हो चुकी है। गांव वालों के मुताबिक, राजेश ने पिछले साल ही गांव के अपने छोटे से घर की मरम्मत करवाई थी। मातम का शोर वातावरण में चहुंओर फैला है। डीएसपी सरदूलगढ़ संजीव गोयल ने बताया कि शहीद राजेश कुमार का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उनके परिजनों और गांववालों ने हाथ जोड़कर शहीद को नमन किया। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नायक राजेश कुमार की शहादत पर गहरा दुख प्रकट किया। उन्होंने राजेश के परिवार के एक सदस्य को नौकरी और 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने का एलान किया।
इधर शहीद सेना के ऑफिसर कर्नल आशुतोष शर्मा की पार्थिव देह सोमवार को जयपुर पहुंची। जबकि मेजर अनुज सूद की पार्थिव देह को चंडीगढ़ लाया गया। श्रीनगर में मौसम खराब होने के कारण शहीदों की देह सोमवार को तय समय से देर से घर पहुंचीं। इसके चलते अंतिम संस्कार मंगलवार को हो पायेगा।  शनिवार को हंदवाड़ा में 21 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आशुतोष शर्मा, मेजर अनुज सूद, नायक राजेश कुमार, लांस नायक दिनेश सिंह और सगीर अहमद काजी शहीद हो गये थे। नायक राजेश कुमार पंजाब के मनसा जबकि लांस नायक दिनेश सिंह उत्तराखंड के अल्मोड़ा से हैं। सगीर अहमद काजी कुपवाड़ा जिले के हैं। इनका अंतिम संस्कार सोमवार को सैन्य सम्मान के साथ कर दिया गया। डिफेंस पीआरओ राजस्थान कर्नल संबित घोष ने बताया कि शहीद का अंतिम संस्कार मंगलवार को होगा। दरअसल श्रीनगर में मौसम खराब होने के कारण पार्थिव देह को हेलिकॉप्टर से जयपुर लाने में देरी हुई।


जयपुर एयरपोर्ट पर श्रद्धांजलि देने के बाद पार्थिव देह को सीधे आर्मी हॉस्पिटल ले जाया गया। मंगलवार को अजमेर रोड स्थित मुक्तिधाम में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। शहीद कर्नल आशुतोष उत्तर प्रदेश से थे। इसके चलते योगी सरकार ने उनके गांव परवाना, बुलंदशहर में उनकी याद में गौरव द्वार बनवाने की घोषणा की है।
हंदवाड़ा एनकाउंटर के दौरान शहीद हुए मेजर अनुज सूद हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा के देहरा इलाके से हैं। हालांकि, उनका परिवार पंचकूला में रहता है। उनका शव भी सोमवार दोपहर बाद चंडीगढ़ पहुंच गया। यहां एयरपोर्ट पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद चंडीगढ़ के कमांड हॉस्पिटल में ले जाया गया। मंगलवार सुबह अंतिम संस्कार पंचकूला के मनीमाजरा श्मशान घाट में किया जाएगा। अनुज के पिता रिटायर्ड ब्रिगेडियर हैं। उनका कहना है कि अनुज ने जो किया वह उसकी ड्यूटी का हिस्सा था, उसे इसकी ट्रेनिंग मिली थी। मेजर सूद की पार्थिव देह को एयरपोर्ट से चंडीगढ़ के कमांड हॉस्पिटल में रखा गया है। मंगलवार को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
नायक दिनेश सिंह रिटायर्ड सूबेदार के बेटे हैं। परिवार इस साल उनकी शादी की तैयारी कर रहा था। दिनेश का परिवार उत्तराखंड के अल्मोड़ा से है। 24 वर्षीय नायक दिनेश के परिवार में सूबेदार पिता के अलावा मां और दो बड़ी बहनें हैं। माता-पिता अल्मोडा के मिरगांव में ही रहते हैं। दिनेश पिछले साल नवंबर में घर आए थे।

कर्नल आशुतोष की पत्नी और बेटी। आशु की तस्वीर के साथ मुस्कुराते हुये।

एनकाउंटर में शहीद होने वालों में सेना के अलावा जम्मू कश्मीर पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर भी हैं। सगीर अहमद काजी उसी कुपवाड़ा जिले के रहने वाले हैं जहां ये एनकाउंटर हुआ। वे इससे पहले कई ऑपरेशन में शामिल हो चुके हैं। इसके चलते स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप में रहते हुए उन्हें तीन आउट ऑफ टर्न प्रमोशन भी मिले थे। इसके बूते वे कांस्टेबल से सब इंस्पेक्टर बने। काजी को कई वीरता पदक भी मिले। इसमें 2009 में शेर-ए-कश्मीर पुलिस मेडल और 2011 में राष्ट्रपति का पुलिस वीरता पदक शामिल है। कुपवाड़ा के करनाह के रहने वाले 42 साल के काजी 1999 में पुलिस के आर्मर्ड विंग में भर्ती हुए थे और 2006 से ऑपरेशन में भाग लेने वाले स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप का हिस्सा थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

9 + = 11