UP कामगारों के लिये सबसे महफूज ठिकाना, सरकारी कर्मियों के कई भत्ते समाप्त, 1500 करोड़ बचेंगे

New Delhi : उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार को दावा किया कि राज्य से अप्रवासी मजदूरों ने पलायन नहीं किया। दूसरे राज्यों से सबसे अधिक दस लाख प्रवासी श्रमिक उत्तर प्रदेश पहुंचे। कोरोना आपदा में उत्तर प्रदेश श्रमिकों और कामगारों के लिए सबसे महफूज ठिकाना बना है। यह अकेला प्रदेश है, जहां से अप्रवासी मजदूरों ने पलायन नहीं किया और इसी प्रदेश में अन्य प्रदेशों से सबसे ज्यादा दस लाख प्रवासी श्रमिक एवं कामगार पहुंचे। सबसे बड़ी आबादी के बावजूद योगी आदित्यनाथ सरकार लगातार सबके लिए भोजन, रोजगार, भरण पोषण और सुरक्षा का इंतजाम कर रही है।

लॉकडाउन के दौरान भी प्रदेश की बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों से योगी सरकार ने हर कर्मचारी को भुगतान कराया। प्रवक्ता ने कहा कि इकाइयों ने 1592.37 करोड़ रुपए वेतन और मानदेय का बड़ा भुगतान किया। बंद पड़ी इकाइयों से सरकार लगातार कर्मचारियों व श्रमिकों का पूरा भुगतान कराती रही।
श्रमिकों, कामगारों के रोजगार, मानदेय और भरण पोषण भत्ते समेत तमाम सुविधाएं दिलाने को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को टीम-11 की बैठक की जो इसी उद्देश्य से बनाई गयी है। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयास से लॉकडाउन-1 के दौरान प्रदेश में सभी 119 चीनी मिलें चलती रहीं। 12,000 र्ईंट भट्टे और 2,500 कोल्ड स्टोरेज भी लगातार चलते रहे। लॉकडाउन-2 में योगी सरकार ने बड़ी औद्योगिक इकाइयां चलवायीं, जिनमें 2.12 लाख लोगों को रोजगार हासिल हुआ। लॉकडाउन-2 में ही एमएसएमई क्षेत्र से 16.40 लाख लोगों को रोजगार मिला। उन्होंने बताया कि मनरेगा में 23.6 लाख लोगों को प्रतिदिन रोजगार मिल रहा है। योगी सरकार अब तक 31.70 लाख निराश्रित एवं निर्माण श्रमिकों को एक-एक हजार रूपये का भरण-पोषण भत्ता और मुफ्त खाद्यान्न मुहैया करा चुकी है।

इधर कोरोना आपदा के बाद आये अतिरिक्त वित्तीय बोझ को ध्यान में रखेत हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने कर्मचारियों को दिए जाने वाले कई भत्ते समाप्त करने का फैसला किया है। पिछले महीने सरकार ने विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को मिलने वाले इन भत्तों को एक साल के लिए रोकने का फैसला किया था। वित्त सचिव संजीव मित्तल की ओर से मंगलवार को जारी अधिसूचना के मुताबिक कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर राज्य सरकार के राजस्व में आई कमी के बाद उन भत्तों की समीक्षा की गई, जो केन्द्र में या तो बंद कर दिए गए हैं या फिर नहीं हैं और राज्य सरकार में अनुमान्य हैं।
विभाग ने सचिवालय भत्ता, पुलिस के विभिन्न प्रकोष्ठों को मिलने वाला विशेष भत्ता, सभी विभागों में जूनियर इंजीनियरों को मिलने वाला विशेष भत्ता, लोक निर्माण विभाग में दिया जाने वाला अनुसंधान भत्ता, अर्दली भत्ता और डिजाइन भत्ता के साथ साथ सिंचाई विभाग में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मिलने वाला अनुसंधान भत्ता तथा भविष्य निधि लेखों का रखरखाव करने वाले कर्मचारियों को मिलने वाले प्रोत्साहन भत्ते आदि को खत्म कर दिया है। सरकार अपने इस कदम से कम से कम 1500 करोड रुपए सालाना बचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने 16 लाख कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढोतरी पर रोक लगाने का पिछले महीने फैसला किया था।

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