गरीबी की पराकाष्ठा : बेटा भूख से बिलख-बिलख कर रोता रहा, मां ऊबालती रही पत्थर

New Delhi : केन्या से गरीबी की एक ऐसी दास्तान सामने आई है, जिसे सुनकर किसी का हृदय चाक हो जाये। ऐसी गरीबी। बच्चे को दिलासा दिलाने के लिये कि खाना पक रहा है, मां पत्थर ऊबालती रही। पड़ोसी ने जब उस मां की इस गरीबी को देखा तो उसने फोन करने प्रशासन और मीडिया को बुला लिया। सब उसकी कहानी सुनकर आश्चर्य में पड़ गये।
केन्या में आठ बच्चों की एक मां ने अपने बच्चों को खाना बनाने का यकीन दिलाने के लिए बर्तन में पत्थर उबालने के लिए डाल दिए। महिला ने बताया कि उसने इसलिए ऐसा किया ताकि बच्चे खाना बनने का इंतजार करते-करते सो जाएं। बीबीसी के मुताबिक, मोम्बासा में रहने वाली महिला पनिहा बहाती किसाव अनपढ़ है। वह लोगों के कपड़े धोती है। कोरोना वायरस की वजह से लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं। इस कारण उसका काम छिन गया है। महिला की पड़ोसी ने यह दुखद दृश्य देखा, तो उन्होंने मीडिया को सूचित किया। साथ ही महिला का एक बैंक अकाउंट भी खोला।

मोम्बासा में रहने वाली पनिहा किसाव। किसावो ने बताया – मुझे अपने सबसे छोटे बच्चे को यकीन दिलाना था कि खाना बन रहा है। वह भूख से रो रहा था। मेरे बाकी बच्चे थोड़े बड़े हैं। जब मैंने उनसे कहा कि हमारे पास खाने के लिए कुछ नहीं है, तो वे समझ गए।

इसके बाद केन्या से कई लोग उसकी मदद को आगे आए। बैंक खाते में और मोबाइल फोन के जरिये महिला को लोगों ने पैसा दान करना शुरू किया। किसावो एक विधवा है। उसके पति को पिछले साल डाकुओं ने मार डाला था। वह दो कमरे के घर में रहती है, जहां न पानी की सुविधा है न बिजली की।
लोगों से मिले मदद पर महिला ने टूको न्यूज वेबसाइट को बताया – मेरे लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि केन्याई इतना प्यार कर सकते हैं। मुझे देश भर से फोन आ रहे हैं। सभी पूछ रहे हैं कि वे और कैसे मदद कर सकते हैं।

किसावो ने बताया – मुझे अपने सबसे छोटे बच्चे को यकीन दिलाना था कि खाना बन रहा है। वह भूख से रो रहा था। मेरे बाकी बच्चे थोड़े बड़े हैं। जब मैंने उनसे कहा कि हमारे पास खाने के लिए कुछ नहीं है, तो वे समझ गए।

केन्याई सरकार ने कोरोनोवायरस से प्रभावित लोगों के लिए फिडिंग कार्यक्रम की शुरुआत की है। लेकिन किसाव समेत कई लोगों तक यह नहीं पहुंच पाया है। वहीं, देश में 411 संक्रमित हैं, जबकि 21 लोगों की मौत हो चुकी है। बीबीसी के मुताबिक केन्या में ज्यादातर स्वास्थ्यकर्मी इस्तेमाल किये गये पीपीई को दोबारा इस्तेमाल करने पर मजबूर हैं। यहां मेडिकल इक्विपमेंट की भारी कमी है।

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