संकट मोचन : हनुमानजी स्वयं प्रकट हुये थे, आज भी इनका दर्शन सारे कष्ट हर लेता है

New Delhi : भगवान श्रीराम के परमभक्त और दुष्टों का संहार करने वाले पवन सुत श्री संकटमोचन हनुमान का पवित्र और प्राचीन मंदिर काशी में स्थित है। मान्यता है कि इस मंदिर में हनुमानजी की स्थापना श्रीरामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी ने स्वयं सन 1608-1611 में अपने हाथो से की थी। उसे स्वयं निर्मित भी किया था। इसकी विशेषता यह है कि यह मिट्टी से निर्मित है। मन्दिर के गर्भगृह के ठीक सामने राम जानकी और लक्ष्मण भी स्थापित हैं। तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस का अधिकाँश भाग यहीं बैठकर लिखा था। आज भी जिसकी पांडुलिपि तुलसीघाट के किनारे स्थित तुलसीदास जी के प्राचीन निवास स्थान में सुरक्षित रूप से रखी हुई है।

ऐसा माना जाता है कि जहाँ आज संकटमोचन मंदिर है वहीँ साक्षात हनुमान जी ने तुलसीदास जी को दर्शन दिया था इसलिए तुलसीदास जी ने संकटमोचन मन्दिर की स्थापना की। प्रारम्भ में इसका स्वरुप लघु था लेकिन सन 1900 में पं महामना मदन मोहन मालवीय जी ने इस मन्दिर का व्यवस्थित निर्माण करवाया तब से लेकर अब तक निरंतर श्रद्धालु देश विदेश दूर दराज़ से यहाँ अपनी श्रद्धा अर्पित करने आते रहते हैं। चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को हनुमान जयन्ती यहाँ बहुत ही धूमधाम से मनाई जाती है, जिस अवसर पर पांच-छह दिवसीय या साप्ताहिक सांगीतिक कार्यक्रम भव्य रूप में मनाया जाता है, जिसमें देश के बहुत से ख्यातिलब्ध कलाकार अपनी कला के द्वारा बाबा संकटमोचन के दरबार में अर्जी लगाते हैं।

पाँचों दिन सारी संगीत और नृत्य का कार्यक्रम चलता रहता है। कलाकार बिना किसी शुल्क के अपना कार्यक्रम श्रद्धाभाव से प्रस्तुत करते हैं, जिसका आनंद लेने के लिए हजारों दर्शक और श्रोतागण आते हैं। इस उत्सव के समय मंदिर का वातावरण संगीतमय हो जाता है। लोगों का ऐसा मानना है कि भगवान् संकट मोचन सभी के दुखों को हरते हैं और किसीको भी खालीहाथ जाने नहीं देते सभी की झोली भरते हैं। जो उनके सच्चे भक्त हैं वो उनके ह्रदय में बसते हैं। तभी तो काशी आने वाला या रहने वाला हर छोटा बड़ा इनके चरणों में आकर मत्था ज़रूर टेकता है।

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