भगवान बुद्ध ने कहा था – आपके पास जो कुछ भी है, उसे बढ़ा-चढ़ा कर मत बताइये, शांति भंग होगी

New Delhi : गौतम बुद्ध के जन्मोत्सव को बुद्ध पूर्णिमा, बुद्ध जयंती और वेसाक के रूप में मनाया जाता है। इस कारण बुद्ध जयंती बौद्ध और हिन्दू धर्म के उपासकों दोनों के लिए विशेष महत्व रखती है। बुद्ध के विचारों को समझकर हम शांति और जीवन के अर्थ को समझ सकते हैं। आज जहां पूरी दुनिया महामारी के खतरे के बीच जीने की लड़ाई लड़ रही है, ऐसे में बुद्ध के विचार हमें जीवन के यर्थाथ को जानने के साथ शांति और उम्मीद भी देते हैं। आप उनके विचारों को अपने दोस्तों को शुभकामनाओं के रूप में भेज सकते हैं।

बूंद से बूंद पानी का घड़ा भरता है, इसी तरह, बुद्धिमान व्यक्ति थोड़ा-थोड़ा इकट्ठा करके खुद को अच्छाई से भर देता है। जो कुछ भी तुम्हारा नहीं है, उसे जाने दो, ऐसा करके तुम्हे लंबी खुशी और लाभ ही प्राप्त होगा। क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी अन्य पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के सामान है, इसमें आप ही जलते हैं। आपके पास जो कुछ भी है, उसे बढ़ा-चढ़ा कर मत बताइए और ना ही दूसरों से ईर्ष्या कीजिए। जो दूसरों से ईर्ष्या करता है उसे मन की शांति कभी नहीं मिलती। तुम अपने क्रोध के लिए दंड नहीं पाओगे, बल्कि तुम अपने क्रोध द्वारा दंड पाओगे।

हिंदू पचांग के अनुसार बैशाख महीने की पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध का जन्‍म हुआ था। इस साल यह खास दिन 7 मई को पड़ रहा है। इस पूर्णिमा को सिद्ध विनायक पूर्णिमा या सत्‍य विनायक पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ को लेकर कुछ विशेष नियम बताए गए हैं जिनका पालन न करने पर भक्तों को ईश्वर की कृपा नहीं मिलती है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन भी ईश्वर अराधना करते समय व्यक्ति को भूलकर भी ये काम नहीं करने चाहिए।

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