सिक्किम ने अक्टूबर तक विदेशी-देशी पर्यटकों के लिये सीमा सील की, कहा – यहां के लोग हमारी प्राथमिकता

New Delhi : कोरोना आपदा के प्रसार के खिलाफ अपनी लड़ाई में, सिक्किम सरकार ने अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए अपनी सीमाओं को बंद करने का फैसला किया है। राज्य सरकार ने कहा कि लगभग सात लाख की आबादी वाले छोटे हिमालयी राज्य में वायरस को प्रवेश से रोकने के लिए यह एक एहतियाती उपाय है। सिक्किम भारत का एक मात्र ऐसा राज्य है जहां पर कोरोना का अभी तक कोई मामला सामने नहीं आया है। इसके अलावा नागालैंड में कोरोना का एक संक्रमित मिला था। लेकिन उसे असम स्थानांतरित किए जाने के बाद यहां पर भी कोरोना का कोई मामला सामने नहीं आया है।

शीर में हर एक व्यक्ति की इंट्री पर नजर है।

सिक्किम भारत का ऐसा राज्य है, जहां 23 अप्रैल तक कोरोना का एक भी केस नहीं मिला है। यहां, अब तक कोरोना के 81 संदिग्ध मिले तो थे, लेकिन सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई। 7 लाख से ज्यादा की आबादी वाले सिक्किम ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई जनवरी में उसी समय शुरू कर दी थी, जब कोरोना ने चीन समेत बाकी देशों में पैर पसारने शुरू ही किए थे। 28 जनवरी से ही यहां की सरकार ने राज्य के दो एंट्री पॉइंट- रंगपो और मेल्ली पर स्क्रीनिंग जरूरी कर दी थी।

सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कहा – सिक्किम अक्टूबर तक सभी पर्यटक गतिविधियों के लिए बंद रहेगा। हमें अपने सात लाख लोगों के हित में यह फैसला करना होगा। हमने सभी प्रवासी कामगारों को भी रखा है और हम उन्हें हर दिन भोजन भी उपलब्ध करा रहे हैं और भुगतान भी कर रहे हैं। हमें पता है कि लॉकडाउन हटने के तुरंत बाद हमें उनकी मदद की आवश्यकता होगी। सिक्किम के कई छात्र थे जो चीन में पढ़ रहे थे। वे सभी जनवरी में ही वापस आ गए थे। इसके बाद, हमने अपनी सीमा को बंद कर दिया और किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दी।

सिक्किम में चहल पहल भी सामान्य होने लगी

राज्यव्यापी लॉकडाउन को 17 मार्च को ही लगा दिया गया था जो कि जनता कर्फ्यू से पहले था। सिक्किम को अपनी जीडीपी का करीब 8% टूरिज्म से उन्होंने कहा कि वापस आये छात्रों को हमने क्वारैंटाइन में रखा, उन्हें तब तक घर नहीं जाने दिया जब तक कि, यह कन्फर्म नहीं हो गया कि, वे कोरोना संक्रमित नहीं हैं। सिक्किम को अपनी जीडीपी का करीब 8% टूरिज्म से मिलता है। यहां की सरकार ने 5 मार्च से विदेशी और 17 मार्च से घरेलू पर्यटकों की एंट्री पर रोक लगा दी थी। राज्य में सालाना 12 से 14 लाख विदेशी और घरेलू पर्टक आते हैं। इनमें से भी सबसे ज्यादा मार्च-अप्रैल में आते हैं।

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