भविष्य बचाओ : जून तक बंद रहेंगे स्कूल-कॉलेज, धार्मिक और सोशल आयोजनों पर छह माह तक रोक संभव

New Delhi : 24 मार्च से जारी लॉकडाउन को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मंथन जारी है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा समेत आठ राज्य इस लॉकडाउन को बढ़ाये जाने के पक्ष में है। दूसरे राज्यों में अभी मंथन चल रहा है। राजस्थान ने केंद्र से मांग की है कि राज्यों को अधिकार दें यह निर्धारित करने का कि कहां लॉकडाउन हो और कहां नहीं हो। इस बीच खबर आ रही है कि लॉकडाउन पर जो भी फैसला हो लेकिन यह तय है कि स्कूल-कॉलेज जून महीने के बाद ही खुलेंगे। यही नहीं धार्मिक आयोजनों पर भी छह महीने की पाबंदी लगाये जाने पर विचार हो रहा है।

यह दृश्य बेहद भयावह हो सकता है।


राज्यों से मिले फीडबैक में सभी प्रकार की धार्मिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना भी शामिल है। राज्यों का कहना है कि प्रतिबंध सभी धर्मों के लिए लागू हो और इसमें कोई छूट नहीं होनी चाहिये। राज्यों का यह भी कहना है कि स्कूल और कॉलेज बिना किसी अपवाद के जून तक बंद रखने होंगे। महामारी कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने 21 दिनों का लॉकडाउन लागू किया है। 14 अप्रैल को खत्म हो रहे लॉकडाउन में फिलहाल एक हफ्ते का समय बाकी है। लेकिन लोगों के मन में सवाल है कि क्या लॉकडाउन बढ़ाया जाएगा या फिर 14 अप्रैल तक ही रहेगा। इस बीच, राज्य सरकारों और विशेषज्ञों ने केंद्र सरकार से लॉकडाउन को और आगे बढ़ाने की अपील की है। केंद्र सरकार इस बारे में विचार कर रही है। प्रधानमंत्री द्वारा गठित उच्च स्तरीय समितियों के समक्ष कई राज्यों ने अपनी प्रतिक्रियाएं भेजी हैं, जिसमें राज्यों ने लॉकडाउन के विस्तार की सिफारिश की है।
केंद्र में और राज्यों में लॉकडाउन से बाहर निकलने के तरीकों पर मंथन शुरू हो गया है। सरकारें इस तैयारी में जुटी हैं कि जब भी लॉकडाउन खत्म हो तब लोगों को राहत देने के साथ-साथ संक्रमण के खतरे से भी बचाया जाये। बहरहाल जो प्लान बना है उसके मुताबिक राज्यों को चार हिस्सों में बांटकर लॉकडाउन खोलने का प्रस्ताव है। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि 14 अप्रैल के बाद लॉकडाउन खत्म होगा या आगे बढ़ेगा। लेकिन जब भी खत्म होगा इसी आधार पर होगा।
पहले चरण में जिस जिले में कोई मरीज नहीं होगा, वहां लोगों को कुछ शर्तों के साथ जिले के अंदर आवाजाही की इजाजत होगी। कुछ जिलों में रेल और बस के साथ-साथ विमान सेवा भी शुरू हो सकती हैं। रेल सर्विस शुरू होती है तो ट्रेन की मिडिल बर्थ बुक नहीं होगी। स्टेशन पर थर्मल स्कैनिंग होगी। स्कूल-कॉलेज, पार्क, सिनेमाघर, व्यावसायिक और निजी प्रतिष्ठान बंद ही रहेंगे। ट्रेनें उन जिलों में नहीं रुकेंगी, जहां एक भी कोरोना संक्रमित मरीज होगा।
रेल, बस और विमान यात्रियों के अलावा यहां काम करने वालों के लिए अलग-अलग एहतियात बरती जायेगी। अदालत, कुरियर सर्विस, रेलवे स्टेशन पर थर्मल स्कैनिंग जरूरी होगी। प्लेटफॉर्म टिकट महंगा होगा। टीटीई इन्फ्रारेड थर्मामीटर से जांच करेगा। ट्रेन में यात्रियों को मास्क और सैनिटाइजर पाउच दिये जायेंगे। एयरपोर्ट पर बुजुर्ग, गर्भवती और बच्चों के लिए बोर्डिंग पास के लिए अलग लाइन होगी। विमान के समय से तीन घंटे पहले यात्री को एयरपोर्ट में जाने की इजाजत नहीं होगी। पहले चरण में 65 साल से ऊपर के लोग घर से नहीं निकलेंगे। दूसरे राज्य में नहीं जा सकेंगे। ट्रेन में अनारक्षित टिकट नहीं मिलेगा। बस-ट्रेन में क्षमता से एक तिहाई कम टिकट बुक होंगे। जिस जिले में केस नहीं होगा, वहां इंडस्ट्री शुरू होगी। लेकिन, श्रमिक उसी जिले के होंगे। जिन शहरों में केस होंगे, वहां ट्रांसपोर्ट बंद रहेगा। सभी धर्मस्थल, शिक्षण संस्थान बंद ही रहेंगे।पहला चरण अगर सफल होता है तो उसके बाद फिर घरेलू विमान चलेंगे। जिस जिले में मरीज होगा, वहां आवाजाही बंद रहेगी। बाकी जिलों में आ-जा सकेंगे। जिन जिलों में कोई मरीज नहीं होगा, वहां गैर जरूरी सामान भी आ-जा सकेगा। इसके बाद भी माहौल ठीक रहा तो शॉपिंग मॉल-सिनेमाघर खुलेंगे दूसरे राज्य में रेल और सड़क मार्ग से आ-जा सकेंगे। सिर्फ वहीं जा सकेंगे, जहां 28 दिन से एक भी केस नहीं आया हो। इंडस्ट्री में राज्य के किसी भी हिस्से से मजदूर काम कर सकेंगे। सबसे अंत में स्कूल-कॉलेज शुरू होंगे, पर कमरे में 50 से ज्यादा स्टूडेंट नहीं होंगे। इसके बाद ही धार्मिक स्थल खुल सकेंगे।

दिल्ली के एक स्कूल की फाइल फोटो जब दिल्ली में स्मॉग था।

इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी मंत्रियों को कोरोना का आर्थिक असर कम से कम करने के लिए युद्ध स्तर पर योजनाएं बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह संकट हमारे लिए ‘मेक इन इंडिया’को बढ़ावा देने और दूसरे देशों पर निर्भरता घटाने का अवसर लाया है।

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