मोदी सरकार ने की 33 करोड़ जरूरतमंदों की मदद पर अब तक 31,235 करोड़ रुपये खर्च किये

New Delhi : केंद्र की मोदी सरकार गरीबों के साथ खड़ी है। हर एक स्कीम में गरीबों की जरूरत का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। बहरहाल प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत 33 करोड़ से भी ज्यादा गरीबों की मदद की गई है। इस मदद में 31,235 करोड़ रुपए की राशि खर्च की गई है। इस रकम का सबसे ज्यादा हिस्सा किसानों और महिलाओं को जन धन खातों में दिया जा रहा है। सरकार की तरफ से जारी 22 अप्रैल तक के वित्तीय सहायता के आंकड़ों के अनुसार – कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन से गरीबों को बचाने के लिए राहत की राशि लगातार पहुंचाई जा रही है। इस रकम को स्थानांतरित करने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी तकनीकों के जरिए तुरंत रकम भेजने का काम किया जा रहा है। ताकि राशि सीधे जरूरतमंद तक पहुंचे।

लॉकडाउन बढ़ाने के बाद एकाएक मुम्बई के बांद्रा रेलवे स्टेशन पर हजारों प्रवासी मजदूर इकट‍्ठा हो गये। मजदूरों ने कहा हमारे पास खाने का पैसा नहीं हमे घर जाने दो।

सरकार की तरफ से वितरित कुल राशि में से 16,146 करोड़ रुपए पीएम-किसान की पहली किस्त के भुगतान में लगाए गए हैं। योजना के तहत 8 करोड़ चिन्हित लाभार्थियों में से सभी 8 करोड़ के खातों में 2,000-2,000 रुपये सीधे डाले गए हैं। वहीं प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खुलवाए गए महिला खाताधारकों को भी इस राहत पैकेज के तहत 500-500 रुपए दिए जा रहे हैं। इसके जरिए 20.05 करोड़ महिला जन धन खाताधारकों को सीधे पैसा ट्रांसफर किया गया है। 22 अप्रैल तक इस मद में कुल वितरण 10,025 करोड़ रुपए का हुआ।
वहीं, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत लगभग 2.82 करोड़ वृद्धों, विधवाओं और दिव्यांगजनों को तकरीबन 1,405 करोड़ रुपए वितरित किए गए। लाभार्थियों को इस योजना के तहत पहली किस्त के रूप में 500 रुपए की राशि दी गई है। 500 रुपए की एक और किस्त का भुगतान अगले महीने किया जाएगा।
2.17 करोड़ भवन एवं निर्माण श्रमिकों को राज्य सरकारों की तरफ से प्रबंधित भवन और निर्माण श्रमिक कोष से वित्तीय सहायता मिली। इसके तहत लाभार्थियों को 3,497 करोड़ रुपये दिए गए हैं। साथ ही सरकार ने उज्जवला योजना के तहत मुफ्त सिलेंडर बांटने और ईपीएफओ के जरिए राशि भी निर्गत की है। वहीं, कर्मचारियों के ईपीएफओ खाते में 24 फीसदी रकम जमा होनी शुरू हो गई है।

मजदूरों का पलायन व्यापक पैमाने पर हुआ लॉकडाउन शुरू होने के साथ ही। सभी अपनी गांव घर गये।

सरकार की तरफ से मनरेगा की बढ़ी हुई मजदूरी दर को अधिसूचित कर दिया गया है, जो 1 अप्रैल 2020 से प्रभावी है। सरकार की तरफ से बताया गया है कि चालू वित्त वर्ष में 1.27 करोड़ कार्य-दिवस सृजित हुए। इसके अलावा, मजदूरी और सामग्री दोनों के लंबित बकाये को समाप्त करने के लिए राज्यों को 7300 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं ताकि उनकी जीविका के सामने पैदा हुआ संकट मुश्किल न खड़ी कर सके।

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