101 पूर्व नौकरशाहों की मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी, कहा- कोरोना के बहाने मुसलमानों का हो रहा उत्पीड़न

New Delhi : एक सौ एक पूर्व नौकरशाहों ने विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर देश के कुछ हिस्सों में मुसलमानों के उत्पीड़न पर दुख प्रकट किया है। उन्होंने तबलीगी जमात द्वारा यहां कार्यक्रम आयोजित करने को एक भटका हुआ एवं निंदनीय कृत्य करार दिया लेकिन मुसलमानों के खिलाफ मीडिया के एक वर्ग द्वारा कथित तौर पर द्वेष फैलाने के कृत्य को बिल्कुल गैर जिम्मेदाराना एवं निंदनीय बताया। पूर्व नौकरशाहों ने एक खुले पत्र में लिखा है कि इस महामारी के कारण उत्पन्न डर एवं असुरक्षा का उपयोग विभिन्न स्थानों पर मुसलमानों को सार्वजनिक स्थानों से दूर रखने के लिए किया जाता है ताकि बाकी लोगों को कथित तौर पर बचाया जाए। उन्होंने कहा कि पूरा देश अप्रत्याशित सदमे से गुजर रहा है।

चिट्ठी लिखने वालों में पूर्व कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर, पूर्व आईपीएस ऑफिसर ए एस दुलत और जुलियो रिबेरो, पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह, दिल्ली के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग और पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त एस वाई कुरैशी शामिल हैं।

उन्होंने कहा, इस महामारी ने हमें जो चुनौती दी है उससे हम एकजुट रह कर एवं एक दूसरे की मदद कर ही लड़ सकते हैं एवं उससे निजात पा सकते हैं। उन्होंने उन मुख्यमंत्रियों की सराहना की जो आम तौर पर और खासकर इस महामारी के संदर्भ में दृढतापूर्वक धर्मनिरपेक्ष बने रहें। अखिल भारतीय, केंद्रीय सेवाओं से जुड़े रहे इन 101 पूर्व नौकरशाहों ने कहा – वे किसी राजनीतिक विचारधारा से जुड़े नहीं है।
पत्र में कहा गया है – बहुत दुख के साथ हम, देश के कुछ हिस्सों में खासकर नई दिल्ली के निजामुद्दीन में मार्च में तबलीगी जमात द्वारा सभा करने के बाद हुए मुसलमानों के उत्पीड़न की खबर की ओर ध्यान आकृष्ट करते हैं। चिट्ठी लिखने वालों में पूर्व कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर, पूर्व आईपीएस ऑफिसर ए एस दुलत और जुलियो रिबेरो, पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह, दिल्ली के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग और पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त एस वाई कुरैशी शामिल हैं।
पत्र में कहा गया है – बहुत दुख के साथ आपके ध्यान में खासकर नई दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में मार्च महीने में तबलीगी जमात की मीटिंग के बाद देश के कुछ हिस्सों में मुसलमानों के उत्पीड़न की खबरें लाना चाहता हूं। नौकरशाहों ने कहा कि देश में कोविड-19 केस उभरने लगे तो सोशल डिस्टैंसिंग के सिद्धांत को नजरअंदाज करने के लिए जमात की आलोचना हुई। हालांकि, मीडिया के कुछ वर्ग ने बाकी सभी राजनीतिक और धार्मिक आयोजनों को छोड़कर सिर्फ इसी घटना के परिप्रेक्ष्य में कोविड-19 को सांप्रदायिक रंग देने में जल्दबाजी दिखाई। मीडिया ने यह भी कहा कि तबलीगी जमात की मंशा देशभर में वायरस फैलाने की है।

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उन्होंने कहा – इससे भी बड़े दुख की बात यह है कि कई जगहों पर ऐसी अफवाह भी फैलाई गई कि मुसलमान अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से भाग रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई जगहों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि कोरोना संकट से निपटने के लिए सरकार की ओर से विशेष राहत सुविधाओं से भी मुसलमान परिवारों को वंचित किया जा रहा है। नौकरशाहों ने मुख्यमंत्रियों से कहा – हम सब आपसे राज्य में सभी लोगों से सोशल डिस्टैंसिंग, चेहरा ढंकने और हाथ धोने जैसे निर्देशों को पालन सुनिश्चित करवाने की अपील करते हैं। साथ ही उन अफवाहों के खंडन की भी जरूरत है कि हमारे देश में किसी खास समूह में ज्यादा संक्रमण है।

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